सहमति से नहीं मिला मंडल अध्यक्ष तो होंगे चुनाव:भाजपा संगठन चुनाव की तैयारियां, भाजपा ने संगठन पर्व नाम दिया
सहमति से नहीं मिला मंडल अध्यक्ष तो होंगे चुनाव:भाजपा संगठन चुनाव की तैयारियां, भाजपा ने संगठन पर्व नाम दिया
यूं तो सर्दी का दौर है, लेकिन राजनीति का मौसम तो गर्म है। सत्तारूढ़ दल भारतीय जनता पार्टी में इन दिनों संगठन के चुनाव की प्रक्रिया चल रही है, जिसे भाजपा ने संगठन पर्व नाम दिया है दिसम्बर माह में भाजपा मंडल अध्यक्ष और भाजपा जिलाध्यक्ष की नियुक्तियां की जाना हैं। इन महत्वपूर्ण पदों पर काबिज होने के लिए दावेदार पूरा जोर लगा रहे हैं। स्थानीय नेताओं से लेकर बड़े नेताओं का समर्थन जुटाने की जुगत में लगे हुए हैं। गौरतलब है कि भाजपा में 15 दिसम्बर तक मंडल अध्यक्षों की नियुक्ति की जाना है, जिसके लिए निर्वाचन अधिकारी भी नियुक्त किए गए हैं। जिले में कई बैठकें हो चुकी है, रायशुमारी का दौर जारी। इन पदों के लिए एक से अधिक नेता अपनी दावेदारी कर रहे हैं, अभी तक आपसी सहमति से और पार्टी द्वारा मंडलों के अध्यक्षों की होती रही हैं, लेकिन सूत्रों की माने तो अब सत्ताधारी दल होने के कारण दावेदारों की अधिकता बताई जा रही है। ऐसे में चुनाव की स्थिति भी बन सकती है। 22 मंडल और सैकड़ों दावेदार
भाजपा में जिले में 22 मंडल हैं, जिनमें मंडल अध्यक्षों की नियुक्तियों की जानी है, सबसे ज्यादा खींचतान की खबरें सीहोर और आष्टा मंडल से आ रही हैं। जहां पर खेमेबाजी ज्यादा दिखाई दे रही है। अब देखना है कि यह मंडल अध्यक्ष का पद किस पाले में जाता है। नौबत आई तो हैं मतदाता
भाजपा नगर मंडल में ज्यादातर देखा गया है कि रायशुमारी से बात बनती आई है और सहमति से मंडल अध्यक्ष नियुक्त हो सकते हैं। यदि दावेदार मतदान कराने पर अड़ते हैं तो फिर चुनाव कराए जाएंगे और चुनाव में मंडल अध्यक्ष, जिला पदाधिकारी, भाजपा प्रदेश पदाधिकारी, प्रदेश कार्यसमिति सदस्य, पार्टी अथवा मोर्चा के राष्ट्रीय पदाधिकारी, मोर्चा जिलाध्यक्ष, वर्तमान नगर पंचायत अध्यक्ष, नगर पालिका अध्यक्ष और उपाध्यक्ष, प्रकोष्ठ के प्रदेश संयोजक, सह संयोजक, जिला पंचायत अध्यक्ष और उपाध्यक्ष, जनपद पंचायत के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष, जिला पंचायत के सदस्य, पूर्व प्रदेश भाजपा पदाधिकारी, पूर्व विधायक, पूर्व सांसद, पूर्व जिलाध्यक्ष, निगम मंडल के पूर्व अध्यक्ष, निवृत्तमान मंडल अध्यक्ष मतदान कर सकते हैं।
यूं तो सर्दी का दौर है, लेकिन राजनीति का मौसम तो गर्म है। सत्तारूढ़ दल भारतीय जनता पार्टी में इन दिनों संगठन के चुनाव की प्रक्रिया चल रही है, जिसे भाजपा ने संगठन पर्व नाम दिया है दिसम्बर माह में भाजपा मंडल अध्यक्ष और भाजपा जिलाध्यक्ष की नियुक्तियां की जाना हैं। इन महत्वपूर्ण पदों पर काबिज होने के लिए दावेदार पूरा जोर लगा रहे हैं। स्थानीय नेताओं से लेकर बड़े नेताओं का समर्थन जुटाने की जुगत में लगे हुए हैं। गौरतलब है कि भाजपा में 15 दिसम्बर तक मंडल अध्यक्षों की नियुक्ति की जाना है, जिसके लिए निर्वाचन अधिकारी भी नियुक्त किए गए हैं। जिले में कई बैठकें हो चुकी है, रायशुमारी का दौर जारी। इन पदों के लिए एक से अधिक नेता अपनी दावेदारी कर रहे हैं, अभी तक आपसी सहमति से और पार्टी द्वारा मंडलों के अध्यक्षों की होती रही हैं, लेकिन सूत्रों की माने तो अब सत्ताधारी दल होने के कारण दावेदारों की अधिकता बताई जा रही है। ऐसे में चुनाव की स्थिति भी बन सकती है। 22 मंडल और सैकड़ों दावेदार
भाजपा में जिले में 22 मंडल हैं, जिनमें मंडल अध्यक्षों की नियुक्तियों की जानी है, सबसे ज्यादा खींचतान की खबरें सीहोर और आष्टा मंडल से आ रही हैं। जहां पर खेमेबाजी ज्यादा दिखाई दे रही है। अब देखना है कि यह मंडल अध्यक्ष का पद किस पाले में जाता है। नौबत आई तो हैं मतदाता
भाजपा नगर मंडल में ज्यादातर देखा गया है कि रायशुमारी से बात बनती आई है और सहमति से मंडल अध्यक्ष नियुक्त हो सकते हैं। यदि दावेदार मतदान कराने पर अड़ते हैं तो फिर चुनाव कराए जाएंगे और चुनाव में मंडल अध्यक्ष, जिला पदाधिकारी, भाजपा प्रदेश पदाधिकारी, प्रदेश कार्यसमिति सदस्य, पार्टी अथवा मोर्चा के राष्ट्रीय पदाधिकारी, मोर्चा जिलाध्यक्ष, वर्तमान नगर पंचायत अध्यक्ष, नगर पालिका अध्यक्ष और उपाध्यक्ष, प्रकोष्ठ के प्रदेश संयोजक, सह संयोजक, जिला पंचायत अध्यक्ष और उपाध्यक्ष, जनपद पंचायत के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष, जिला पंचायत के सदस्य, पूर्व प्रदेश भाजपा पदाधिकारी, पूर्व विधायक, पूर्व सांसद, पूर्व जिलाध्यक्ष, निगम मंडल के पूर्व अध्यक्ष, निवृत्तमान मंडल अध्यक्ष मतदान कर सकते हैं।