बैलगाड़ी से घूम रहे विदेशी, रात में गा रहे भजन:पचमढ़ी के पर्यटकों का होम स्टे बना छिंदवाड़ा का सावरवानी, 300 विदेशी सैलानी आ चुके
बैलगाड़ी से घूम रहे विदेशी, रात में गा रहे भजन:पचमढ़ी के पर्यटकों का होम स्टे बना छिंदवाड़ा का सावरवानी, 300 विदेशी सैलानी आ चुके
'प्रकृति की खूबसूरत वादियां, मिट्टी के घर, सूर्योदय, आंख खुलने पर पक्षियों की चहचहाहट, ताजी हवा, शुद्ध भोजन....' अब शहरी लोगों के लिए यह सब दुर्लभ है। यही वजह है कि छिंदवाड़ा जिले का सावरवानी गांव अन्य राज्यों के सैलानियों समेत विदेशियों को भी भा रहा है। अब तक 300 से ज्यादा विदेशी पर्यटक यहां प्राकृतिक सौंदर्य को जीने आ चुके हैं। शनिवार-रविवार और छुट्टियों वाले दिनों में बुकिंग ज्यादा रहती है। महाराष्ट्र-दिल्ली से टूरिस्ट ज्यादा आते हैं। बैलगाड़ी पर घूमना, गायों का दूध निकालना, उन्हें खिलाना, छोटे-मोटे कृषि कार्यों में भाग लेना और पास के मोनाखेड़ी पहाड़ी पर ट्रैकिंग करना, ढोलक-मंचीरे के साथ भजन और आदिवासी कर्मा नृत्य मंडलियों की उपलब्धता जैसे अनुभव लोगों को आकर्षित कर रहे हैं। खासतौर पर पचमढ़ी घूमने आने वाले पर्यटकों के लिए यह पसंदीदा होम स्टे बन चुका है। यहां लोग सुविधाओं के साथ कच्चे घरों में रहते हैं। ग्रामीण जीवन को अनुभव करते हैं। ऑर्गेनिक तरीके उगाई गई सब्जी व फल के साथ स्थानीय भोजन करते हैं। यह कल्चर बहुत रास आ रहा है। कई लोग तो दो से तीन बार आ चुके हैं। घूमने आए कुछ पर्यटक कहते हैं कि बच्चे यहां आकर मोबाइल फोन से दूर हो जाते हैं। हमें यह देखकर सुकून मिलता है। वरना हमारे शहर के घरों में तो वे दिन भर टीवी और मोबाइल में ही लगे रहते हैं। हमसे बात तक नहीं करते। स्टे बनने से आसपास के तीन गांवों की महिलाओं और ग्रामीणों को भी घर में ही रोजगार मिल गया है। आज हम सवारवानी गांव के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसे अंतरराष्ट्रीय पर्यटन दिवस पर केंद्र सरकार ने जिम्मेदार पर्यटन श्रेणी में पुरस्कार दिला। पहले कुछ तस्वीरें देख लीजिए... क्रिसमस तक के लिए अभी से पूरे होम स्टे बुक
ग्रामीण जीवन और कल्चर को देखने आने वाले होम-स्टे के लिए मिट्टी के घर (मड हाउस) बने हैं। इनका किराया तीन हजार रूपए प्रतिदिन है, जिसमें दोनों वक्त का भोजन एवं चाय नि:शुल्क मुहैया कराई जाती है। शाम को गांव के लोकल ट्राइबल ग्रुप शैला लोक नृत्य से पर्यटकों का मनोरंजन करते हैं। हालांकि अब तक 7 होम स्टे ही बने हैं, प्रशासन का दावा है कि जल्द इनकी संख्या 67 होने वाली है। पर्यटकों के पॉजिटिव रिस्पॉन्स के कारण भी लोगों में बेहद उत्साह है। छिंदवाड़ा जिला मुख्यालय से 120 किलोमीटर दूर और पचमढ़ी हिल स्टेशन से 32 किलोमीटर दूर प्रकृति की गोद में सावरवानी गांव बसा है। गांव की बच्चियां यहां गाइड और संचालक के रूप में कार्य कर रहीं है। तीन गांव की सावरवानी ग्राम पंचायत में बने होम स्टे से लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिल रहा है। सावरवानी गांव के पर्यटन विकास समिति के अध्यक्ष कमलेश यदुवंशी ने बताया कि पिछले दिनों गुजरात के 6 व्यापारी एक दिन के लिए आए थे, उन्हें इतना अच्छा लगा कि 7 दिन यहीं रहे। हर महीने 50-60 टूरिस्ट आ रहे हैं। क्रिसमस की छुट्टियों के लिए अभी से पूरे होम स्टे बुक हैं। पर्यटक बोले- बच्चे मोबाइल-टीवी से दूर रहते हैं नागपुर से 15 दिन में दूसरी बार आए डॉक्टर विकास ठाकुर ने बताया कि हमारे बच्चे के जन्म दिन मनाने के लिए 12 अक्टूबर का यहां आए थे। यह जगह इतनी पसंद आई कि हमने इस बार दूसरी जगह जाने का सोचा तक नहीं। यहां पूरा नैसर्गिक वातावरण है मिट्टी और लकड़ियों का देसी घर है, स्वच्छता है। यहां भोजन में बाड़ी में उगी जैविक सब्जियां और मक्का-बाजरा, रागी सहित मोटे अनाज की रोटियां दी जाती हैं। यहां के भोजन से पेट खराब नहीं होता। मैं पिछली बार तामिया आया था तब इस होम स्टे के बारे में जानकारी मिली, तब से हमेशा यहां आने का मन करता। उनकी पत्नी ने कहा कि यहां अच्छा और शांति पूर्ण वातावरण है। हमारा बच्चा यहां बाहर दोस्तों के साथ खेल रहा है। मोबाइल और टीवी से दूर है। लोगों को डील कर रहा हैं। उनके बेटे यथार्थ सिंह ठाकुर ने बताया कि मेरे यहां बहुत सारे दोस्त बन गए हैं, मुझे यहां बहुत अच्छा लगता है। पर्यटन गांव का दर्जा मिलने से सूरत बदली, विस्थापन रुका सावरवानी की नेहा यदुवंशी बताती हैं कि उनके पिता नहीं हैं, मां ने मजदूरी कर पढ़ाया। लेकिन होम स्टे की ट्रेनिंग के बाद हम आत्मनिर्भर होकर अपना खर्च खुद उठा रहे हैं। ग्रामीण महिला ने बताया कि पहले गांव में पीने का पानी और पर्याप्त साफ-सफाई की व्यवस्था नहीं थी। लेकिन होम स्टे बनने के बाद इनमें सुधार आया है। लोगों को रोजगार मिला है। पर्यटकों को बैलगाड़ी से गांव घुमाने वाले बुजुर्ग बताते हैं कि पहले काम की तलाश में दूसरे जिलों में जाना पड़ता था लेकिन होम स्टे शुरू होने के बाद अच्छी आमदनी हो रही है। गांव का एक चक्कर घुमाने पर पर्यटक 300 रुपए टिप देते हैं। सावरवानी के आसपास ये आकर्षक लोकेशन शांति और प्राकृतिक परिवेश पर्यटकों को आकर्षित करता है। सावरवानी घूमने आने वाले चावलपानी के पास अनहोनी हॉट स्प्रिंग और खारा वाटर डिवाइन पूल जैसे आस-पास के प्राकृतिक आकर्षणों के साथ-साथ घोघरा झरना, तामिया, पातालकोट और झिगरिया झरने का आनंद ले सकते हैं। सतपुड़ा राष्ट्रीय उद्यान का बफर जोन भी गांव से सटा हुआ है। सावरवानी में सप्तधारा झरना भी है। पास के अनहोनी गांव में गर्म पानी के कुण्ड का विजिट भी पर्यटकों के लिए प्रमुख आकर्षण का विषय है। कहा जाता है कि यहां के पानी को त्वचा में लगाने से चर्म रोग दूर हो जाते हैं। गांव के निकट ही एक मौनी बाबा की पहाड़ी है। पर्यटकों को इस पर ट्रैकिंग भी कराई जाती है। जनजातीय बालिकाएं पर्यटकों को गाइड करती हैं। तेलंगाना-छत्तीसगढ़ से केस स्टडी करने आ चुके शोधार्थी मध्यप्रदेश टूरिज्म बोर्ड ने इस गांव के होम-स्टे को मॉडल के रूप में विकसित किया है। होम-स्टे करने वाले पर्यटक यहां की सुविधाओं की तारीफ करते नहीं थकते। हाल ही में तेलंगाना और छत्तीसगढ़ राज्य के 'होम-स्टे सुविधा प्रदाता' सावरवानी में दी जा रही सुविधाओं की केस स्टडी करने आए थे। बीते दिनों छिन्दवाड़ा जिले के धूसावानी के होम-स्टे संचालक भी तीन
'प्रकृति की खूबसूरत वादियां, मिट्टी के घर, सूर्योदय, आंख खुलने पर पक्षियों की चहचहाहट, ताजी हवा, शुद्ध भोजन....' अब शहरी लोगों के लिए यह सब दुर्लभ है। यही वजह है कि छिंदवाड़ा जिले का सावरवानी गांव अन्य राज्यों के सैलानियों समेत विदेशियों को भी भा रहा है। अब तक 300 से ज्यादा विदेशी पर्यटक यहां प्राकृतिक सौंदर्य को जीने आ चुके हैं। शनिवार-रविवार और छुट्टियों वाले दिनों में बुकिंग ज्यादा रहती है। महाराष्ट्र-दिल्ली से टूरिस्ट ज्यादा आते हैं। बैलगाड़ी पर घूमना, गायों का दूध निकालना, उन्हें खिलाना, छोटे-मोटे कृषि कार्यों में भाग लेना और पास के मोनाखेड़ी पहाड़ी पर ट्रैकिंग करना, ढोलक-मंचीरे के साथ भजन और आदिवासी कर्मा नृत्य मंडलियों की उपलब्धता जैसे अनुभव लोगों को आकर्षित कर रहे हैं। खासतौर पर पचमढ़ी घूमने आने वाले पर्यटकों के लिए यह पसंदीदा होम स्टे बन चुका है। यहां लोग सुविधाओं के साथ कच्चे घरों में रहते हैं। ग्रामीण जीवन को अनुभव करते हैं। ऑर्गेनिक तरीके उगाई गई सब्जी व फल के साथ स्थानीय भोजन करते हैं। यह कल्चर बहुत रास आ रहा है। कई लोग तो दो से तीन बार आ चुके हैं। घूमने आए कुछ पर्यटक कहते हैं कि बच्चे यहां आकर मोबाइल फोन से दूर हो जाते हैं। हमें यह देखकर सुकून मिलता है। वरना हमारे शहर के घरों में तो वे दिन भर टीवी और मोबाइल में ही लगे रहते हैं। हमसे बात तक नहीं करते। स्टे बनने से आसपास के तीन गांवों की महिलाओं और ग्रामीणों को भी घर में ही रोजगार मिल गया है। आज हम सवारवानी गांव के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसे अंतरराष्ट्रीय पर्यटन दिवस पर केंद्र सरकार ने जिम्मेदार पर्यटन श्रेणी में पुरस्कार दिला। पहले कुछ तस्वीरें देख लीजिए... क्रिसमस तक के लिए अभी से पूरे होम स्टे बुक
ग्रामीण जीवन और कल्चर को देखने आने वाले होम-स्टे के लिए मिट्टी के घर (मड हाउस) बने हैं। इनका किराया तीन हजार रूपए प्रतिदिन है, जिसमें दोनों वक्त का भोजन एवं चाय नि:शुल्क मुहैया कराई जाती है। शाम को गांव के लोकल ट्राइबल ग्रुप शैला लोक नृत्य से पर्यटकों का मनोरंजन करते हैं। हालांकि अब तक 7 होम स्टे ही बने हैं, प्रशासन का दावा है कि जल्द इनकी संख्या 67 होने वाली है। पर्यटकों के पॉजिटिव रिस्पॉन्स के कारण भी लोगों में बेहद उत्साह है। छिंदवाड़ा जिला मुख्यालय से 120 किलोमीटर दूर और पचमढ़ी हिल स्टेशन से 32 किलोमीटर दूर प्रकृति की गोद में सावरवानी गांव बसा है। गांव की बच्चियां यहां गाइड और संचालक के रूप में कार्य कर रहीं है। तीन गांव की सावरवानी ग्राम पंचायत में बने होम स्टे से लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिल रहा है। सावरवानी गांव के पर्यटन विकास समिति के अध्यक्ष कमलेश यदुवंशी ने बताया कि पिछले दिनों गुजरात के 6 व्यापारी एक दिन के लिए आए थे, उन्हें इतना अच्छा लगा कि 7 दिन यहीं रहे। हर महीने 50-60 टूरिस्ट आ रहे हैं। क्रिसमस की छुट्टियों के लिए अभी से पूरे होम स्टे बुक हैं। पर्यटक बोले- बच्चे मोबाइल-टीवी से दूर रहते हैं नागपुर से 15 दिन में दूसरी बार आए डॉक्टर विकास ठाकुर ने बताया कि हमारे बच्चे के जन्म दिन मनाने के लिए 12 अक्टूबर का यहां आए थे। यह जगह इतनी पसंद आई कि हमने इस बार दूसरी जगह जाने का सोचा तक नहीं। यहां पूरा नैसर्गिक वातावरण है मिट्टी और लकड़ियों का देसी घर है, स्वच्छता है। यहां भोजन में बाड़ी में उगी जैविक सब्जियां और मक्का-बाजरा, रागी सहित मोटे अनाज की रोटियां दी जाती हैं। यहां के भोजन से पेट खराब नहीं होता। मैं पिछली बार तामिया आया था तब इस होम स्टे के बारे में जानकारी मिली, तब से हमेशा यहां आने का मन करता। उनकी पत्नी ने कहा कि यहां अच्छा और शांति पूर्ण वातावरण है। हमारा बच्चा यहां बाहर दोस्तों के साथ खेल रहा है। मोबाइल और टीवी से दूर है। लोगों को डील कर रहा हैं। उनके बेटे यथार्थ सिंह ठाकुर ने बताया कि मेरे यहां बहुत सारे दोस्त बन गए हैं, मुझे यहां बहुत अच्छा लगता है। पर्यटन गांव का दर्जा मिलने से सूरत बदली, विस्थापन रुका सावरवानी की नेहा यदुवंशी बताती हैं कि उनके पिता नहीं हैं, मां ने मजदूरी कर पढ़ाया। लेकिन होम स्टे की ट्रेनिंग के बाद हम आत्मनिर्भर होकर अपना खर्च खुद उठा रहे हैं। ग्रामीण महिला ने बताया कि पहले गांव में पीने का पानी और पर्याप्त साफ-सफाई की व्यवस्था नहीं थी। लेकिन होम स्टे बनने के बाद इनमें सुधार आया है। लोगों को रोजगार मिला है। पर्यटकों को बैलगाड़ी से गांव घुमाने वाले बुजुर्ग बताते हैं कि पहले काम की तलाश में दूसरे जिलों में जाना पड़ता था लेकिन होम स्टे शुरू होने के बाद अच्छी आमदनी हो रही है। गांव का एक चक्कर घुमाने पर पर्यटक 300 रुपए टिप देते हैं। सावरवानी के आसपास ये आकर्षक लोकेशन शांति और प्राकृतिक परिवेश पर्यटकों को आकर्षित करता है। सावरवानी घूमने आने वाले चावलपानी के पास अनहोनी हॉट स्प्रिंग और खारा वाटर डिवाइन पूल जैसे आस-पास के प्राकृतिक आकर्षणों के साथ-साथ घोघरा झरना, तामिया, पातालकोट और झिगरिया झरने का आनंद ले सकते हैं। सतपुड़ा राष्ट्रीय उद्यान का बफर जोन भी गांव से सटा हुआ है। सावरवानी में सप्तधारा झरना भी है। पास के अनहोनी गांव में गर्म पानी के कुण्ड का विजिट भी पर्यटकों के लिए प्रमुख आकर्षण का विषय है। कहा जाता है कि यहां के पानी को त्वचा में लगाने से चर्म रोग दूर हो जाते हैं। गांव के निकट ही एक मौनी बाबा की पहाड़ी है। पर्यटकों को इस पर ट्रैकिंग भी कराई जाती है। जनजातीय बालिकाएं पर्यटकों को गाइड करती हैं। तेलंगाना-छत्तीसगढ़ से केस स्टडी करने आ चुके शोधार्थी मध्यप्रदेश टूरिज्म बोर्ड ने इस गांव के होम-स्टे को मॉडल के रूप में विकसित किया है। होम-स्टे करने वाले पर्यटक यहां की सुविधाओं की तारीफ करते नहीं थकते। हाल ही में तेलंगाना और छत्तीसगढ़ राज्य के 'होम-स्टे सुविधा प्रदाता' सावरवानी में दी जा रही सुविधाओं की केस स्टडी करने आए थे। बीते दिनों छिन्दवाड़ा जिले के धूसावानी के होम-स्टे संचालक भी तीन दिन के प्रशिक्षण लेने यहां आए थे। सहयोगी संस्था सतपुड़ा सेल्फ रिलायंट फॉर्मर के साथ रिस्पांसिबल ग्राम अंचल पर्यटन जागरूकता समिति धूसावानी के सदस्यों ने सावरवानी की होम-स्टे एक्टिविटी देखी और यहां रुके पर्यटकों से रियल टाईम फीडबैक लिया। खरगोन, छतरपुर, बालाघाट, बैतूल, नर्मदापुरम व अन्य जिलों से कई एक्सपोजर ग्रुप भी सावरवानी का विजिट करके जा चुके हैं। वे यहां होम स्टेयर्स (पर्यटकों) को दिए जा रहे घरेलू भोजन, सुविधाओं और अन्य मनोरंजन गतिविधियों को देखकर आश्चर्य चकित हो गए। इन एक्सपोजर ग्रुप्स ने तय किया कि वे अपने गांव के होम-स्टे को भी सावरवानी मॉडल जैसा ही बनाएंगे, ताकि पर्यटन को बढ़ावा मिले और पर्यटक खुद को सुरक्षित भी महसूस करें। ऑनलाइन हो सकती है बुकिंग मध्यप्रदेश टूरिज्म बोर्ड द्वारा बनाए गए होम स्टे की बुकिंग एमपी टूरिज्म की वेबसाइट https://www.mptourism.com/ समेत ट्रैवल पोर्टल से भी की जा सकती है। टूरिस्ट ऑनलाइन होम स्टे का फोटो देखकर नाम के माध्यम से होम स्टे की बुकिंग करते हैं। होम स्टे की बुकिंग 3 हजार रूपए प्रतिदिन की दर के हिसाब से होती है। इन नंबर्स पर डायल करके भी बुकिंग करवाई जा सकती है...