छठ महापर्व नहाय-खाय के साथ शुरू:भोजपुरी पूर्वांचल समाज कल खरना के साथ 36 घंटे का करेगा निर्जला व्रत
छठ महापर्व नहाय-खाय के साथ शुरू:भोजपुरी पूर्वांचल समाज कल खरना के साथ 36 घंटे का करेगा निर्जला व्रत
विनायकी चतुर्थी, ज्येष्ठा और मूल नक्षत्र के शुभ संयोग के बीच 5 नवंबर(मंगलवार) को सूर्य आराधना के छठ महापर्व का शुभारंभ नहाय-खाय के साथ शुरू हुआ। कल से खरना रस्म के साथ ही भोजपुरी व पूर्वांचल समाज के परिवारों में 36 घंटे के निर्जला व्रत की शुरुआत होगी, जिसका समापन 8 नवंबर को सुबह उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देने के साथ होगा। मेयर मालती राय आज शीतल दास की बगिया, कमला पार्क भोपाल में घाट का निरीक्षण करेंगी। धृति योग में होगी 7 नवंबर को छठ पूजा, सूर्य को देंगे अर्घ्य भोजपुरी एकता मंच के अध्यक्ष कुंवर प्रसाद ने बताया कि नहाए खाए का दिन विशेष महत्व रखता है। इस दिन व्रत करने वाले लोग नदी या तालाब में स्नान कर छठ करने का संकल्प लेते हैं। इस दिन विशेष रूप से चावल, चना दाल और लौकी या कद्दू से बनी सब्जी का सेवन किया जाता है। 7 नवंबर को गुरुवार को धृति योग में छठ महापर्व मनाया जाएगा। यह तिथि नंदा संज्ञक तिथि है, जिसका अर्थ है आनंद देने वाला दिवस। इस तिथि के आराध्य सूर्य व माता षष्ठी के साथ ही इसके स्वामी भगवान कार्तिकेय भी हैं। इस दिन शाम को समाज के लोग पानी में खड़े होकर डूबते हुए सूर्य को अर्ध्य देंगे। खटलापुरा घाट पर गूंजेंगे भोजपुरी भजन और लोकगीत इस साल छठ पूजा का महापर्व 5 नवंबर(मंगलवार) से आरंभ हो रहा है। चार दिवसीय इस उत्सव के पहले दिन को 'नहाय खाय' और दूसरे दिन को 'खरना' कहा जाता है। तीसरे दिन डूबते सूर्य को अर्घ्य देने की परंपरा को 'डाला छठ पूजा' कहलाता है, जबकि चौथे दिन उगते सूर्य को अर्घ्य देकर इस महापर्व का समापन होता है। छठ पर्व पर शहर में विभिन्न घाटों व मंदिरों समेत करीब 50 स्थानों पर पूजा की जाएगी। इन स्थलों पर सोमवार को भी साफ-सफाई, रंगाई व सजावट आदि का कार्य चलता रहा। छठ तिथि 6 नवंबर की मध्य रात्रि 12.41 पर शुरू होकर 7 नवंबर की मध्य रात्रि 12.24 बजे तक रहेगी। उल्लेखनीय है कि यह पर्व प्रकृति के प्रति श्रद्धा और आस्था का प्रतीक माना जाता है। मुख्य रूप से बिहार का यह पर्व अब वैश्विक रूप धारण कर चुका है और विश्व भर में बिहार एवं पूर्वी उत्तरप्रदेश के परिवार इसे मनाते हैं।
विनायकी चतुर्थी, ज्येष्ठा और मूल नक्षत्र के शुभ संयोग के बीच 5 नवंबर(मंगलवार) को सूर्य आराधना के छठ महापर्व का शुभारंभ नहाय-खाय के साथ शुरू हुआ। कल से खरना रस्म के साथ ही भोजपुरी व पूर्वांचल समाज के परिवारों में 36 घंटे के निर्जला व्रत की शुरुआत होगी, जिसका समापन 8 नवंबर को सुबह उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देने के साथ होगा। मेयर मालती राय आज शीतल दास की बगिया, कमला पार्क भोपाल में घाट का निरीक्षण करेंगी। धृति योग में होगी 7 नवंबर को छठ पूजा, सूर्य को देंगे अर्घ्य भोजपुरी एकता मंच के अध्यक्ष कुंवर प्रसाद ने बताया कि नहाए खाए का दिन विशेष महत्व रखता है। इस दिन व्रत करने वाले लोग नदी या तालाब में स्नान कर छठ करने का संकल्प लेते हैं। इस दिन विशेष रूप से चावल, चना दाल और लौकी या कद्दू से बनी सब्जी का सेवन किया जाता है। 7 नवंबर को गुरुवार को धृति योग में छठ महापर्व मनाया जाएगा। यह तिथि नंदा संज्ञक तिथि है, जिसका अर्थ है आनंद देने वाला दिवस। इस तिथि के आराध्य सूर्य व माता षष्ठी के साथ ही इसके स्वामी भगवान कार्तिकेय भी हैं। इस दिन शाम को समाज के लोग पानी में खड़े होकर डूबते हुए सूर्य को अर्ध्य देंगे। खटलापुरा घाट पर गूंजेंगे भोजपुरी भजन और लोकगीत इस साल छठ पूजा का महापर्व 5 नवंबर(मंगलवार) से आरंभ हो रहा है। चार दिवसीय इस उत्सव के पहले दिन को 'नहाय खाय' और दूसरे दिन को 'खरना' कहा जाता है। तीसरे दिन डूबते सूर्य को अर्घ्य देने की परंपरा को 'डाला छठ पूजा' कहलाता है, जबकि चौथे दिन उगते सूर्य को अर्घ्य देकर इस महापर्व का समापन होता है। छठ पर्व पर शहर में विभिन्न घाटों व मंदिरों समेत करीब 50 स्थानों पर पूजा की जाएगी। इन स्थलों पर सोमवार को भी साफ-सफाई, रंगाई व सजावट आदि का कार्य चलता रहा। छठ तिथि 6 नवंबर की मध्य रात्रि 12.41 पर शुरू होकर 7 नवंबर की मध्य रात्रि 12.24 बजे तक रहेगी। उल्लेखनीय है कि यह पर्व प्रकृति के प्रति श्रद्धा और आस्था का प्रतीक माना जाता है। मुख्य रूप से बिहार का यह पर्व अब वैश्विक रूप धारण कर चुका है और विश्व भर में बिहार एवं पूर्वी उत्तरप्रदेश के परिवार इसे मनाते हैं।