रीवा में मजार पर नहीं थम रहा विवाद:अधिवक्ता ने सीबीआई जांच की मांग की; बोले- जमीन बगीचे की, वक्फ बोर्ड की नहीं
रीवा में मजार पर नहीं थम रहा विवाद:अधिवक्ता ने सीबीआई जांच की मांग की; बोले- जमीन बगीचे की, वक्फ बोर्ड की नहीं
रीवा के अमहिया स्थित मजार को लेकर एक बार फिर मामला गरमा गया है। जहां बीजेपी विधायक सिद्धार्थ तिवारी और मुस्लिम पक्ष के आरोप-प्रत्यारोप के बाद अब अधिवक्ता ने मामले की सीबीआई जांच की मांग की है, साथ ही जमीन को नगर निगम की जमीन बताया है। अब जमीन के इतिहास को लेकर भी दावे किए गए है। अधिवक्ता के मुताबिक वे मामले के जल्द समाधान के लिए कलेक्टर और कमिश्नर से भी शिकायत करने वाले हैं। सीबीआई जांच की मांग अधिवक्ता बीके माला ने कहा कि जिस जमीन के बारे में बार-बार ये कहा जा रहा है कि जमीन वक्फ बोर्ड की है। मैं कहना चाहता हूं कि उस जमीन की जांच करा ली जाए। दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा। उन्होंने आगे कहा कि मैं बताना चाहता हूं कि आसपास की सारी जमीन बगीचे की जमीन है। जहां पर औषधि युक्त एक बगीचा हुआ करता था। 7 एकड़ 52 डिसमिल की जमीन एक तरफ थी। 4 एकड़ 11 डिसमिल जमीन दूसरी तरफ थी। बीच से एक नाला निकला हुआ था। जो बीहर-बिछिया नदी की एक शाखा हुआ करती थी। जिसका उपयोग बगिया को सीचने के लिए किया जाता था। उसी बगिया में कुशवाहा, यादव और खान परिवार देखभाल का काम करते थे। एक तरह से तीनों परिवार चौकीदारी का काम करते थे। जहां पर लोगों ने कब्जा कर लिया। बीके माला ने बताया कि अब सभी जमीन पर अपना-अपना दावा ठोकने में लगे हुए हैं। बहुत से लोग राजनीतिक रोटियां भी सेक रहे हैं। मैं पूरे प्रकरण की सीबीआई जांच के लिए मांग करता हूं। अगर इस हरी-भरी जमीन पर अतिक्रमण न किया गया होता तो आज शहर में एक सुन्दर पर्यटन स्थल होता। जमीन पर दावा करने वालों को आत्म मंथन करना चाहिए। भाजपा विधायक के पोस्ट से शुरु हुआ था विवाद अमहिया स्थिति मजार को लेकर विवाद की शुरुआत भाजपा विधायक सिद्दार्थ तिवारी के पोस्ट और बयान के बाद शुरू हुई थी। जहां भाजपा विधायक ने सोशल मीडिया में पोस्ट कर लिखा था कि 3 बाय 3 की मजार अब बड़ी बिल्डिंग में तब्दील कर दी गई है। उन्होंने नवरात्रि पर मजार का अतिक्रमण हटाए जाने की मांग की थी। जबकि मुस्लिम समाज ने कहा था कि उनके इस बयान से भावनाएं आहत हुई हैं। उन्होंने कहा कि अतिक्रमण हटाने की शुरुआत करनी ही है तो विधायक के घर से की जाए। मुस्लिम पक्ष ने जमीन को वक्फ बोर्ड की संपत्ति बताया था। जिसके बाद मामला सुर्खियों में आ गया था। अब मामले में अधिवक्ता की एंट्री हो गई है।
रीवा के अमहिया स्थित मजार को लेकर एक बार फिर मामला गरमा गया है। जहां बीजेपी विधायक सिद्धार्थ तिवारी और मुस्लिम पक्ष के आरोप-प्रत्यारोप के बाद अब अधिवक्ता ने मामले की सीबीआई जांच की मांग की है, साथ ही जमीन को नगर निगम की जमीन बताया है। अब जमीन के इतिहास को लेकर भी दावे किए गए है। अधिवक्ता के मुताबिक वे मामले के जल्द समाधान के लिए कलेक्टर और कमिश्नर से भी शिकायत करने वाले हैं। सीबीआई जांच की मांग अधिवक्ता बीके माला ने कहा कि जिस जमीन के बारे में बार-बार ये कहा जा रहा है कि जमीन वक्फ बोर्ड की है। मैं कहना चाहता हूं कि उस जमीन की जांच करा ली जाए। दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा। उन्होंने आगे कहा कि मैं बताना चाहता हूं कि आसपास की सारी जमीन बगीचे की जमीन है। जहां पर औषधि युक्त एक बगीचा हुआ करता था। 7 एकड़ 52 डिसमिल की जमीन एक तरफ थी। 4 एकड़ 11 डिसमिल जमीन दूसरी तरफ थी। बीच से एक नाला निकला हुआ था। जो बीहर-बिछिया नदी की एक शाखा हुआ करती थी। जिसका उपयोग बगिया को सीचने के लिए किया जाता था। उसी बगिया में कुशवाहा, यादव और खान परिवार देखभाल का काम करते थे। एक तरह से तीनों परिवार चौकीदारी का काम करते थे। जहां पर लोगों ने कब्जा कर लिया। बीके माला ने बताया कि अब सभी जमीन पर अपना-अपना दावा ठोकने में लगे हुए हैं। बहुत से लोग राजनीतिक रोटियां भी सेक रहे हैं। मैं पूरे प्रकरण की सीबीआई जांच के लिए मांग करता हूं। अगर इस हरी-भरी जमीन पर अतिक्रमण न किया गया होता तो आज शहर में एक सुन्दर पर्यटन स्थल होता। जमीन पर दावा करने वालों को आत्म मंथन करना चाहिए। भाजपा विधायक के पोस्ट से शुरु हुआ था विवाद अमहिया स्थिति मजार को लेकर विवाद की शुरुआत भाजपा विधायक सिद्दार्थ तिवारी के पोस्ट और बयान के बाद शुरू हुई थी। जहां भाजपा विधायक ने सोशल मीडिया में पोस्ट कर लिखा था कि 3 बाय 3 की मजार अब बड़ी बिल्डिंग में तब्दील कर दी गई है। उन्होंने नवरात्रि पर मजार का अतिक्रमण हटाए जाने की मांग की थी। जबकि मुस्लिम समाज ने कहा था कि उनके इस बयान से भावनाएं आहत हुई हैं। उन्होंने कहा कि अतिक्रमण हटाने की शुरुआत करनी ही है तो विधायक के घर से की जाए। मुस्लिम पक्ष ने जमीन को वक्फ बोर्ड की संपत्ति बताया था। जिसके बाद मामला सुर्खियों में आ गया था। अब मामले में अधिवक्ता की एंट्री हो गई है।