मप्र में जिला पेंशन कार्यालय बंद करने का विरोध:भविष्य में लाखों कर्मचारियों को करना पड़ेगा परेशानी का सामना : तिवारी

मध्य प्रदेश तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ सहित अन्य कर्मचारी संगठनों में प्रदेश के जिलों में संचालित पेंशन कार्यालय बंद करने का विरोध किया है। कर्मचारियों का कहना है कि राज्य सरकार इन कार्यालयों को बंद करने का निर्णय ले चुकी है, जो कर्मचारी हित में नहीं है। तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ के प्रदेश महामंत्री उमाशंकर तिवारी कहते हैं कि इसके दूरगामी परिणाम खतरनाक होंगे। लाखों कर्मचारियों को पेंशन से संबंधित छोटी-छोटी समस्याओं और शिकायतों के लिए भोपाल भागना पड़ेगा। जिससे पेंशनरों को शारीरिक, मानसिक और आर्थिक कष्ट होगा। तिवारी कहते हैं कि 60 और 62 वर्ष से अधिक उम्र के रिटायर कर्मचारियों को पेंशन मिलती है। कुछ कर्मचारी तो ऐसे भी हैं, जो 90 साल के हो गए हैं। वे शारीरिक रूप से कमजोर हो चुके हैं। इनमें से कुछ के परिवार में लाने-ले जाने के लिए तरुणाई भी है, लेकिन कुछ के बच्चे बाहर जा चुके हैं। ऐसे में उन्हें कोई समस्या होती है, तो वे पड़ोसी या पहचान वालों के साथ जिले में ही पेंशन कार्यालय तक पहुंच जाते हैं और उनकी समस्या हल हो जाती है। जिले के कार्यालय बंद होने पर उन्हें भोपाल आना पड़ेगा और प्रदेश के अंतिम छोर के जिले से भोपाल लाने के लिए उनके पास कोई नहीं होगा। ऐसे में जीवन के अंतिम दौर में उन्हें तकलीफ के अलावा कुछ नहीं होगा। समस्या बड़ी हुई और उसका समाधान नहीं हुआ, तो संभव है उन्हें पेंशन मिलना भी बंद हो जाए, ऐसे में जीवनभर शासन को सेवा देने वाला कर्मचारी बुढ़ापे में अपनी क्षुधा मिटाने के लिए दर-दर भटकेगा। तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष अतुल मिश्रा, कार्यकारी अध्यक्ष मोहन अय्यर ने भी मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से जिला पेंशन कार्यालयों को बंद नहीं करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि सरकार इस मामले में संवेदनशीलता दिखाते हुए इन कार्यालयों को बंद करने का निर्णय वापस ले।

मप्र में जिला पेंशन कार्यालय बंद करने का विरोध:भविष्य में लाखों कर्मचारियों को करना पड़ेगा परेशानी का सामना : तिवारी
मध्य प्रदेश तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ सहित अन्य कर्मचारी संगठनों में प्रदेश के जिलों में संचालित पेंशन कार्यालय बंद करने का विरोध किया है। कर्मचारियों का कहना है कि राज्य सरकार इन कार्यालयों को बंद करने का निर्णय ले चुकी है, जो कर्मचारी हित में नहीं है। तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ के प्रदेश महामंत्री उमाशंकर तिवारी कहते हैं कि इसके दूरगामी परिणाम खतरनाक होंगे। लाखों कर्मचारियों को पेंशन से संबंधित छोटी-छोटी समस्याओं और शिकायतों के लिए भोपाल भागना पड़ेगा। जिससे पेंशनरों को शारीरिक, मानसिक और आर्थिक कष्ट होगा। तिवारी कहते हैं कि 60 और 62 वर्ष से अधिक उम्र के रिटायर कर्मचारियों को पेंशन मिलती है। कुछ कर्मचारी तो ऐसे भी हैं, जो 90 साल के हो गए हैं। वे शारीरिक रूप से कमजोर हो चुके हैं। इनमें से कुछ के परिवार में लाने-ले जाने के लिए तरुणाई भी है, लेकिन कुछ के बच्चे बाहर जा चुके हैं। ऐसे में उन्हें कोई समस्या होती है, तो वे पड़ोसी या पहचान वालों के साथ जिले में ही पेंशन कार्यालय तक पहुंच जाते हैं और उनकी समस्या हल हो जाती है। जिले के कार्यालय बंद होने पर उन्हें भोपाल आना पड़ेगा और प्रदेश के अंतिम छोर के जिले से भोपाल लाने के लिए उनके पास कोई नहीं होगा। ऐसे में जीवन के अंतिम दौर में उन्हें तकलीफ के अलावा कुछ नहीं होगा। समस्या बड़ी हुई और उसका समाधान नहीं हुआ, तो संभव है उन्हें पेंशन मिलना भी बंद हो जाए, ऐसे में जीवनभर शासन को सेवा देने वाला कर्मचारी बुढ़ापे में अपनी क्षुधा मिटाने के लिए दर-दर भटकेगा। तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष अतुल मिश्रा, कार्यकारी अध्यक्ष मोहन अय्यर ने भी मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से जिला पेंशन कार्यालयों को बंद नहीं करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि सरकार इस मामले में संवेदनशीलता दिखाते हुए इन कार्यालयों को बंद करने का निर्णय वापस ले।