मध्य प्रदेश कर्मचारी कांग्रेस के पदाधिकारी उप मुख्यमंत्री से मिले:3 साल से बीएलओ का काम कर रहे शिक्षक-कर्मचारियों को कार्यमुक्त करने की मांग
मध्य प्रदेश कर्मचारी कांग्रेस के पदाधिकारी उप मुख्यमंत्री से मिले:3 साल से बीएलओ का काम कर रहे शिक्षक-कर्मचारियों को कार्यमुक्त करने की मांग
चिकित्सा महाविद्यालय, होम्योपैथी चिकित्सा महाविद्यालय, विभिन्न अस्पताल और स्कूल शिक्षा विभाग के कर्मचारी व शिक्षकों को चुनाव कार्य से मुक्त करने की मांग को लेकर मप्र कर्मचारी कांग्रेस के पदाधिकारी उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल से मिले। संघ के अध्यक्ष सुरेंद्र निगम ने उप मुख्यमंत्री को बताया कि इन कार्यालयों के अलावा भी सैकड़ों कर्मचारी अब भी चुनाव ड्यूटी में लगे हैं। उन्हें बूथ लेबल अधिकारी (बीएलओ) बनाया गया था और पिछले 3 एवं 4 साल से ये कर्मचारी वहीं काम कर रहे हैं। निगम ने बताया कि चुनाव कार्य में संलग्न होने के कारण इन कर्मचारियों के मूल विभाग का काम प्रभावित हो रहा है। इसमें बच्चों की पढ़ाई भी है। संगठन के संरक्षक वीरेन्द्र खोंगल ने बताया कि प्रदेश के चिकित्सालय,होम्योपैथिक चिकित्सालय एवं स्कूल शिक्षा विभाग के शिक्षक मुख्य कार्य करने के बजाय निर्वाचन संबंधी कार्यों में ड्यूटी कर रहे हैं। यह कर्मचारी पिछले 3-4 सालों से मतदाता सूची का कार्य कर रहे हैं। इससे स्वास्थ्य एवं शिक्षा सेवाएं प्रभावित हो रही हैं। नेताद्वय ने बताया कि चिकित्सालय में विभिन्न रोगों के हजारों मरीज प्रतिदिन उपचार कराने आते हैं, लेकिन चिकित्सालय में मशीनों का संचालन करने वाले विशेषज्ञ ना होने के कारण मरीजों को दूसरी जगह जांच कराना पड़ रही है। इससे मरीज परेशान हो रहे हैं और आर्थिक हानि भी हो रही है। संबंधित विभागों के अधिकारियों ने कलेक्टर को पत्र लिखकर अत्यावश्यक कार्य करने वाले कर्मचारियों को मतदाता सूची कार्य से मुक्त करने के लिए अनेक बार आग्रह भी किया, पर इन कर्मचारियों को चुनाव कार्य से मुक्त नहीं किया जा रहा है।
चिकित्सा महाविद्यालय, होम्योपैथी चिकित्सा महाविद्यालय, विभिन्न अस्पताल और स्कूल शिक्षा विभाग के कर्मचारी व शिक्षकों को चुनाव कार्य से मुक्त करने की मांग को लेकर मप्र कर्मचारी कांग्रेस के पदाधिकारी उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल से मिले। संघ के अध्यक्ष सुरेंद्र निगम ने उप मुख्यमंत्री को बताया कि इन कार्यालयों के अलावा भी सैकड़ों कर्मचारी अब भी चुनाव ड्यूटी में लगे हैं। उन्हें बूथ लेबल अधिकारी (बीएलओ) बनाया गया था और पिछले 3 एवं 4 साल से ये कर्मचारी वहीं काम कर रहे हैं। निगम ने बताया कि चुनाव कार्य में संलग्न होने के कारण इन कर्मचारियों के मूल विभाग का काम प्रभावित हो रहा है। इसमें बच्चों की पढ़ाई भी है। संगठन के संरक्षक वीरेन्द्र खोंगल ने बताया कि प्रदेश के चिकित्सालय,होम्योपैथिक चिकित्सालय एवं स्कूल शिक्षा विभाग के शिक्षक मुख्य कार्य करने के बजाय निर्वाचन संबंधी कार्यों में ड्यूटी कर रहे हैं। यह कर्मचारी पिछले 3-4 सालों से मतदाता सूची का कार्य कर रहे हैं। इससे स्वास्थ्य एवं शिक्षा सेवाएं प्रभावित हो रही हैं। नेताद्वय ने बताया कि चिकित्सालय में विभिन्न रोगों के हजारों मरीज प्रतिदिन उपचार कराने आते हैं, लेकिन चिकित्सालय में मशीनों का संचालन करने वाले विशेषज्ञ ना होने के कारण मरीजों को दूसरी जगह जांच कराना पड़ रही है। इससे मरीज परेशान हो रहे हैं और आर्थिक हानि भी हो रही है। संबंधित विभागों के अधिकारियों ने कलेक्टर को पत्र लिखकर अत्यावश्यक कार्य करने वाले कर्मचारियों को मतदाता सूची कार्य से मुक्त करने के लिए अनेक बार आग्रह भी किया, पर इन कर्मचारियों को चुनाव कार्य से मुक्त नहीं किया जा रहा है।