भुगतान के लिए भटक रहा आदिवासी परिवार
छत्तीसगढ़ संवाददाता
रामानुजगंज, 23 अप्रैल। जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक मर्यादित शाखा रामानुजगंज में मृतक के नाम पर कथित रूप से फर्जी लोन स्वीकृत होने का मामला सामने आया है। इस मामले में एक आदिवासी परिवार को जमा राशि निकालने के लिए महीनों से बैंक के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। परिजनों ने मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, ग्राम चाकी निवासी स्वर्गीय राजकुमार भूईया का निधन 9 दिसंबर 2019 को हो चुका है। इसके बावजूद 12 जून 2020 को उनके नाम पर 80 हजार रुपये का लोन स्वीकृत कर दिया गया। संबंधित खाता में धान विक्रय की लगभग 70 हजार रुपये की राशि पहले से जमा बताई जा रही है।
मृतक की पत्नी और पुत्र जब बैंक में जमा राशि निकालने पहुंचे तो उन्हें लगातार अलग-अलग कारण बताकर टाल दिया गया। पहले उनसे शपथ पत्र लाने को कहा गया, उसके बाद समिति त्रिकुण्डा से नो-ड्यूज प्रमाण पत्र जमा करने को कहा गया। परिजनों का कहना है कि सभी आवश्यक दस्तावेज जमा करने के बावजूद करीब चार माह तक उन्हें भुगतान नहीं किया गया।
परिवार के अनुसार, 22 अप्रैल 2026 को शाखा प्रबंधक ने उन्हें जानकारी दी कि खाते में 80 हजार रुपये का बकाया लोन दर्ज है और जब तक उक्त राशि जमा नहीं की जाएगी, तब तक खाते से भुगतान नहीं किया जाएगा।
परिजनों ने शाखा प्रबंधक पर जातिगत अभद्र व्यवहार करने और अपमानजनक शब्दों का प्रयोग करने का भी आरोप लगाया है।
परिवार ने बताया कि उनके घर में विवाह कार्यक्रम प्रस्तावित है, लेकिन आर्थिक संकट के कारण वे गंभीर परेशानी का सामना कर रहे हैं। इस मामले को लेकर पूर्व जिला पंचायत सदस्य मुमताज अंसारी ने भी नाराजगी व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि बैंक की लापरवाही और संभावित अनियमितता का खामियाजा एक गरीब आदिवासी परिवार को भुगतना पड़ रहा है, जो अत्यंत चिंताजनक है।
आवेदकों ने अनुविभागीय अधिकारी से मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई करने तथा मृतक के खाते में जमा राशि दिलाने की मांग की है।
भुगतान के लिए भटक रहा आदिवासी परिवार
छत्तीसगढ़ संवाददाता
रामानुजगंज, 23 अप्रैल। जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक मर्यादित शाखा रामानुजगंज में मृतक के नाम पर कथित रूप से फर्जी लोन स्वीकृत होने का मामला सामने आया है। इस मामले में एक आदिवासी परिवार को जमा राशि निकालने के लिए महीनों से बैंक के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। परिजनों ने मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, ग्राम चाकी निवासी स्वर्गीय राजकुमार भूईया का निधन 9 दिसंबर 2019 को हो चुका है। इसके बावजूद 12 जून 2020 को उनके नाम पर 80 हजार रुपये का लोन स्वीकृत कर दिया गया। संबंधित खाता में धान विक्रय की लगभग 70 हजार रुपये की राशि पहले से जमा बताई जा रही है।
मृतक की पत्नी और पुत्र जब बैंक में जमा राशि निकालने पहुंचे तो उन्हें लगातार अलग-अलग कारण बताकर टाल दिया गया। पहले उनसे शपथ पत्र लाने को कहा गया, उसके बाद समिति त्रिकुण्डा से नो-ड्यूज प्रमाण पत्र जमा करने को कहा गया। परिजनों का कहना है कि सभी आवश्यक दस्तावेज जमा करने के बावजूद करीब चार माह तक उन्हें भुगतान नहीं किया गया।
परिवार के अनुसार, 22 अप्रैल 2026 को शाखा प्रबंधक ने उन्हें जानकारी दी कि खाते में 80 हजार रुपये का बकाया लोन दर्ज है और जब तक उक्त राशि जमा नहीं की जाएगी, तब तक खाते से भुगतान नहीं किया जाएगा।
परिजनों ने शाखा प्रबंधक पर जातिगत अभद्र व्यवहार करने और अपमानजनक शब्दों का प्रयोग करने का भी आरोप लगाया है।
परिवार ने बताया कि उनके घर में विवाह कार्यक्रम प्रस्तावित है, लेकिन आर्थिक संकट के कारण वे गंभीर परेशानी का सामना कर रहे हैं। इस मामले को लेकर पूर्व जिला पंचायत सदस्य मुमताज अंसारी ने भी नाराजगी व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि बैंक की लापरवाही और संभावित अनियमितता का खामियाजा एक गरीब आदिवासी परिवार को भुगतना पड़ रहा है, जो अत्यंत चिंताजनक है।
आवेदकों ने अनुविभागीय अधिकारी से मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई करने तथा मृतक के खाते में जमा राशि दिलाने की मांग की है।