घर-घर मन रहा मकर संक्रांति पर्व:सुबह-सुबह मंदिरों में पहुंचे श्रद्धालु, तिल से की पूजा, गरीबों में बांटी गजक-कंबल
घर-घर मन रहा मकर संक्रांति पर्व:सुबह-सुबह मंदिरों में पहुंचे श्रद्धालु, तिल से की पूजा, गरीबों में बांटी गजक-कंबल
ग्वालियर में 14 जनवरी को मकर संक्रांति पर्व मनाया जा रहा है। मंगलवार को सुबह-सुबह शहर के लोगों ने मंदिरों में पहुंचकर भगवान के दर्शन कर सुख समृद्धि की कामना की। भगवान को तिल मिष्ठान का भोग लगाकर प्रसाद चढ़ाया। इतना ही नहीं भजन कीर्तन भी किए। संक्रांति के मौके पर दान का विशेष महत्व रहता है। यही कारण है कि मंदिरों के आसपास बैठने वाले गरीब व बेसहारा लोगों को तिल मिष्ठान,गजक व कंबल सहित अन्य गर्म कपड़ों का वितरण किया गया है। संक्रांति पर्व पर पतंगबाजी का भी विशेष महत्व है। शहर में कुछ सामाजिक संस्थाओं व संगठन ने पतंगबाजी कर परम्परा निभाई है। ग्वालियर सूर्य मंदिर में पहली किरण के साथ हुई संक्रांति की पूजा
मकर संक्रांति को सूर्य भगवान की आराधना की जाती है। सूर्य की पहली किरण के साथ यहां विशेष पूजा अर्चना की गई। इसके चलते श्रद्धालु गोला का मंदिर स्थित सूर्य मंदिर पहुंचे हैं। सूर्य मंदिर में मंगलवार सुबह भगवान सूर्य की आराधना के लिए काफी संख्या में भक्त पहुंचे हैं। साथ ही श्रद्धालुओं ने सुबह जल्दी उठकर गंगाजल मिलाकर स्नान किया। इसके बाद भगवान सूर्य को अर्घ्य देकर आराधना की। इसके साथ ही सुबह से शहर के मंदिरों में पहुंचने वाले लोगों ने भगवान को तिल के मिष्ठान्न तथा खिचड़ी अर्पित की, इसके साथ ही दान देकर पुण्य लिया।
मंदिरों में दिखी मकर संक्रांति की रौनक
इसके साथ ही अचलेश्वर महादेव और सनातन धर्म मन्दिर में मकर संक्रांति पर्व श्रद्धाभाव के साथ मनाया गया। भगवान चक्रधर के दर्शन लाभ एवं दानपुण्य लाभ के लिए सुबह से ही श्रद्धालुओं के आने का क्रम प्रारंभ हो गया। भक्तों ने खिचड़ी, तिल, गजक भगवान को अर्पण की। भगवान श्रीचक्रधर, श्री गिरिराजधरण का विशेष शृंगार मुख्य पुजारी ने किया। भगवान को नई पोशाक, माला धारण कराई गई। पगड़ी मोरपंख माथे पर धारण कराया गया, गले में श्री तुलसी की कंठी, वनमाला धारण कराई गई। सायंकालीन सत्र में श्री चक्रधर का खिचड़ी उत्सव मनाया गया।
मकर राशि में सूर्य के प्रवेश से सहालग शुरू
मकर संक्रांति से सूर्य उत्तरायण हो जाएंगे। एक माह से चल रहा धनुर्मास उत्सव खरमास खत्म हो गया है। अब सूर्य मकर राशि में प्रवेश करेंगे। मकर संक्रांति को देवताओं का प्रभातकाल भी कहा जाता है। मकर संक्रांति से दिन तिल-तिल बढ़ने लगते हैं। साथ ही खरमास खत्म हो जाएंगे और सहालग शुरू हो जाएंगे।
दान का विशेष महत्व
मकर संक्रांति पर दान का विशेष महत्व है। गणेश मंदिर, हनुमान, शिव मंदिर व सूर्य मंदिर सहित शहर भर के अन्य प्रमुख मंदिरों में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचेंगे। तिल-गुड़ और तिल-गुड़ से बने व्यंजन अर्पित किए जाएंगे।16 जनवरी से मांगलिक कार्यों की शुरुआत भी हो जाएगी। जनवरी माह में विवाह के 8 शुभ मुहूर्त हैं।
ग्वालियर में 14 जनवरी को मकर संक्रांति पर्व मनाया जा रहा है। मंगलवार को सुबह-सुबह शहर के लोगों ने मंदिरों में पहुंचकर भगवान के दर्शन कर सुख समृद्धि की कामना की। भगवान को तिल मिष्ठान का भोग लगाकर प्रसाद चढ़ाया। इतना ही नहीं भजन कीर्तन भी किए। संक्रांति के मौके पर दान का विशेष महत्व रहता है। यही कारण है कि मंदिरों के आसपास बैठने वाले गरीब व बेसहारा लोगों को तिल मिष्ठान,गजक व कंबल सहित अन्य गर्म कपड़ों का वितरण किया गया है। संक्रांति पर्व पर पतंगबाजी का भी विशेष महत्व है। शहर में कुछ सामाजिक संस्थाओं व संगठन ने पतंगबाजी कर परम्परा निभाई है। ग्वालियर सूर्य मंदिर में पहली किरण के साथ हुई संक्रांति की पूजा
मकर संक्रांति को सूर्य भगवान की आराधना की जाती है। सूर्य की पहली किरण के साथ यहां विशेष पूजा अर्चना की गई। इसके चलते श्रद्धालु गोला का मंदिर स्थित सूर्य मंदिर पहुंचे हैं। सूर्य मंदिर में मंगलवार सुबह भगवान सूर्य की आराधना के लिए काफी संख्या में भक्त पहुंचे हैं। साथ ही श्रद्धालुओं ने सुबह जल्दी उठकर गंगाजल मिलाकर स्नान किया। इसके बाद भगवान सूर्य को अर्घ्य देकर आराधना की। इसके साथ ही सुबह से शहर के मंदिरों में पहुंचने वाले लोगों ने भगवान को तिल के मिष्ठान्न तथा खिचड़ी अर्पित की, इसके साथ ही दान देकर पुण्य लिया।
मंदिरों में दिखी मकर संक्रांति की रौनक
इसके साथ ही अचलेश्वर महादेव और सनातन धर्म मन्दिर में मकर संक्रांति पर्व श्रद्धाभाव के साथ मनाया गया। भगवान चक्रधर के दर्शन लाभ एवं दानपुण्य लाभ के लिए सुबह से ही श्रद्धालुओं के आने का क्रम प्रारंभ हो गया। भक्तों ने खिचड़ी, तिल, गजक भगवान को अर्पण की। भगवान श्रीचक्रधर, श्री गिरिराजधरण का विशेष शृंगार मुख्य पुजारी ने किया। भगवान को नई पोशाक, माला धारण कराई गई। पगड़ी मोरपंख माथे पर धारण कराया गया, गले में श्री तुलसी की कंठी, वनमाला धारण कराई गई। सायंकालीन सत्र में श्री चक्रधर का खिचड़ी उत्सव मनाया गया।
मकर राशि में सूर्य के प्रवेश से सहालग शुरू
मकर संक्रांति से सूर्य उत्तरायण हो जाएंगे। एक माह से चल रहा धनुर्मास उत्सव खरमास खत्म हो गया है। अब सूर्य मकर राशि में प्रवेश करेंगे। मकर संक्रांति को देवताओं का प्रभातकाल भी कहा जाता है। मकर संक्रांति से दिन तिल-तिल बढ़ने लगते हैं। साथ ही खरमास खत्म हो जाएंगे और सहालग शुरू हो जाएंगे।
दान का विशेष महत्व
मकर संक्रांति पर दान का विशेष महत्व है। गणेश मंदिर, हनुमान, शिव मंदिर व सूर्य मंदिर सहित शहर भर के अन्य प्रमुख मंदिरों में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचेंगे। तिल-गुड़ और तिल-गुड़ से बने व्यंजन अर्पित किए जाएंगे।16 जनवरी से मांगलिक कार्यों की शुरुआत भी हो जाएगी। जनवरी माह में विवाह के 8 शुभ मुहूर्त हैं।