सोयाबीन की फसल पर बारिश का असर:इल्लियों का प्रकोप और पीलापन भी बढ़ा, किसानों नहीं मिल पा रही लागत
सोयाबीन की फसल पर बारिश का असर:इल्लियों का प्रकोप और पीलापन भी बढ़ा, किसानों नहीं मिल पा रही लागत
पीला सोना कहे जाने वाला सोयाबीन इस बार फिर किसानों को निराश कर रहा है। बे-मौसम हो रही बारिश के कारण सोयाबीन पर इल्ली की प्रकोप और पीलापन बढ़ गया है। जिसके चलते सोयाबीन की फसल कई क्षेत्रों में प्रभावित हुई है। खासकर निचली क्षेत्र में उत्पादन ज्यादा प्रभावित होने की बात सामने आ रही है। कहीं-कहीं तो एक बीघा क्षेत्र में दो तीन क्विंटल भी उत्पादन नहीं हो रहा। ऐसे में किसान परेशान हैं। उनकी लागत भी नहीं निकल रही है। किसान लगातार प्रशासन से सर्वे करने की मांग कर रहे हैं। मगर सर्वे में क्रॉप कटिंग की जा रही फसल उसमें ना तो राजस्व का अधिकार है ना ही बीमा कम्पनी मौजूद है। इन क्षेत्रों में एक ग्राम सेवक ही खुद यह कार्य कर रहा है। इससे किसानों की फसलों का बीमा मिलना ना मुमकिन लग रहा है। बढ़ने लगी बीमारी किसानों ने बताया कि लगातार बारिश के कारण सोयाबीन की फसल पीली पड़ गई और बीमारियां लग गई। जिससे फसल पूरी तरह खराब हो गई है। किसान राजेश यादव ने बताया सोयाबीन की फसल बोई थी लेकिन उत्पादन 3 क्विंटल भी नहीं निकल पा रहा है। तो दूसरी ओर बारिश की झड़ी ने खेतों में कटी फसल व बोई फसल के बीज को खराब कर दिया है। विदाई के पहले मानसून ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर गई है। सोयाबीन जलमग्न, कर किसानों के सपने चूर कर दिए। खरीफ फसल कम होने के कारण बारिश की अनियमितता, कीट प्रकोप से नुकसान लागत की तुलना में नुकसान ज्यादा,औसतन उत्पादकता कम होना, जल्दी उत्पादन वाली वैरायटी को इस बार नुकसानी झेलनी पड़ी है। बाद वाली सोयाबीन को जाते हुए मानसून ने पछाड़ दिया जिसे दाने का खराब होना व पीले सोने की चमक फीकी कर दी किसान बताते है कि हमने महंगे भाव का बीज बोया था, किन्तु प्रकृति की मार से हम परेशान हो गए हैं। वहीं अभी आसमान में बादल छाए हैं जिसे अब भी चिंतित है अब किसान फसलों को समय से पहले सिमटने में लगा है। फसल के लिए फायदेमंद मानसून की विदाई के समय हो रही बारिश में किसानों को थोड़ी राहत तो दी क्योंकि बरसात के दिनों में इस बार रुक-रुककर बारिश से तालाब व नदियां खाली थे। अब मानसून ने किसानों को थोड़ी राहत दी। जिससे आने वाली फसलों को फायदा कर दिया। अब आगामी फसल लहसुन, प्याज, गेहूं, चना आदि के लिए ये बारिश फायदेमंद है। इससे गेहूं के अलावा अन्य फसलों का रकबा भी बढ़ेगा। आने वाले दिनों में मौसम खराब होने का अनुमान है। सोयाबीन कटाई के साथ किसान खेतों को सुधारने में लगे हैं।
पीला सोना कहे जाने वाला सोयाबीन इस बार फिर किसानों को निराश कर रहा है। बे-मौसम हो रही बारिश के कारण सोयाबीन पर इल्ली की प्रकोप और पीलापन बढ़ गया है। जिसके चलते सोयाबीन की फसल कई क्षेत्रों में प्रभावित हुई है। खासकर निचली क्षेत्र में उत्पादन ज्यादा प्रभावित होने की बात सामने आ रही है। कहीं-कहीं तो एक बीघा क्षेत्र में दो तीन क्विंटल भी उत्पादन नहीं हो रहा। ऐसे में किसान परेशान हैं। उनकी लागत भी नहीं निकल रही है। किसान लगातार प्रशासन से सर्वे करने की मांग कर रहे हैं। मगर सर्वे में क्रॉप कटिंग की जा रही फसल उसमें ना तो राजस्व का अधिकार है ना ही बीमा कम्पनी मौजूद है। इन क्षेत्रों में एक ग्राम सेवक ही खुद यह कार्य कर रहा है। इससे किसानों की फसलों का बीमा मिलना ना मुमकिन लग रहा है। बढ़ने लगी बीमारी किसानों ने बताया कि लगातार बारिश के कारण सोयाबीन की फसल पीली पड़ गई और बीमारियां लग गई। जिससे फसल पूरी तरह खराब हो गई है। किसान राजेश यादव ने बताया सोयाबीन की फसल बोई थी लेकिन उत्पादन 3 क्विंटल भी नहीं निकल पा रहा है। तो दूसरी ओर बारिश की झड़ी ने खेतों में कटी फसल व बोई फसल के बीज को खराब कर दिया है। विदाई के पहले मानसून ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर गई है। सोयाबीन जलमग्न, कर किसानों के सपने चूर कर दिए। खरीफ फसल कम होने के कारण बारिश की अनियमितता, कीट प्रकोप से नुकसान लागत की तुलना में नुकसान ज्यादा,औसतन उत्पादकता कम होना, जल्दी उत्पादन वाली वैरायटी को इस बार नुकसानी झेलनी पड़ी है। बाद वाली सोयाबीन को जाते हुए मानसून ने पछाड़ दिया जिसे दाने का खराब होना व पीले सोने की चमक फीकी कर दी किसान बताते है कि हमने महंगे भाव का बीज बोया था, किन्तु प्रकृति की मार से हम परेशान हो गए हैं। वहीं अभी आसमान में बादल छाए हैं जिसे अब भी चिंतित है अब किसान फसलों को समय से पहले सिमटने में लगा है। फसल के लिए फायदेमंद मानसून की विदाई के समय हो रही बारिश में किसानों को थोड़ी राहत तो दी क्योंकि बरसात के दिनों में इस बार रुक-रुककर बारिश से तालाब व नदियां खाली थे। अब मानसून ने किसानों को थोड़ी राहत दी। जिससे आने वाली फसलों को फायदा कर दिया। अब आगामी फसल लहसुन, प्याज, गेहूं, चना आदि के लिए ये बारिश फायदेमंद है। इससे गेहूं के अलावा अन्य फसलों का रकबा भी बढ़ेगा। आने वाले दिनों में मौसम खराब होने का अनुमान है। सोयाबीन कटाई के साथ किसान खेतों को सुधारने में लगे हैं।