पिस्टल और कारतूस के साथ पकड़ाए युवकों की जमानत:पुलिस ने बिश्नोई गैंग का मेंबर बताया था; इंदौर कोर्ट में वकील का पक्ष- झूठे केस में उलझाया

इंदौर की लसूड़िया पुलिस ने दिसंबर के पहले हफ्ते में राजस्थान के तीन युवकों को पकड़ा था। उन्हें बिश्नोई गैंग का मेंबर बताकर उनके पास से पिस्टल और जिंदा कारतूस बरामद किए गए थे। बाद में तीनों को जेल भेजा गया। अब मामले में जिला कोर्ट से तीनों युवकों को जमानत मिल गई है। तीनों युवकों के वकील ने कोर्ट में वह डॉक्यूमेंट रखे है जिसमें उन्हें बिना वजह पुलिस हिरासत में लेने की पहले ही अपील की गई थी। अपील में पुलिस द्वारा बेवजह तीनों को आरोपी बनाने की बात कही गई। कोर्ट इस मामले में सहमत हुई। इसके बाद तीनों को जमानत दे दी गई। जिला न्यायालय ने भूपेन्द्र सिंह निवासी सागर खरवा ब्यावर राजस्थान, आदेश चौधरी निवासी रामगंज अजमेर और दीपक सिंह निवासी अजमेर को शनिवार को जमानत दे दी है। वकील पवन राय की तरफ से तीनों की जमानत की अर्जी लगाई गई थी। लसूड़िया पुलिस ने 4 दिसंबर को तीनों आरोपियों को कोर्ट में पेश कर बिश्नोई गैंग के मेंबर बताया था। कोर्ट में यह भी कहा गया था कि, तीनों इंदौर बायपास पर किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने पहुंचे थे। इसके पहले ही पुलिस ने चेकिंग में उन्हें पकड़ लिया। वकील ने दिए यह तर्क मामले में तीनों के वकील पवन राय ने अपने तर्क में कोर्ट के सामने कुछ दस्तावेज रखे। जिसमें बताया कि गया कि उन्होंने पुलिस से न्यायालय द्वारा पत्राचार करके आरोपियों के गिरफ्तारी सबंधी कागज पुलिस अफसरों तक भेजे थे। इसमें पुलिस ने तीनों के हिरासत में नही होने की बात कही थी। वकील ने कोर्ट को बताया कि उन्होंने आरोपियों की पुलिस द्वारा बताई गिरफ्तारी के पहले कोर्ट में यह भी अपील की थी कि तीनों को पुलिस झूठे केस में फंसा सकती है। उन्होंने तीनों पर लगे प्रकरण में समय और तारीख के हिसाब से बेबुनियाद बताया। इस पर न्यायालय ने मामले को संदेह मानकर तीनों को जमानत दे दी। महाकाल दर्शन कर ओंकारेश्वर जा रहे थे वकील ने कोर्ट में यह भी बताया कि, तीनों अपनी जीप से उज्जैन से इंदौर पहुंचे थे। इंदौर बायपास से ओंकारेश्वर के लिए निकले थे। इसी दौरान मुखबिर ने पुलिसकर्मियों को जानकारी दी। भूपेंद्र पर पूर्व में छोटे प्रकरण दर्ज होने के चलते तीनों को थाने ले जाया गया। यहां पुलिसकर्मी साठगांठ की कोशिश करते रहे। उनके परिवार से संपर्क किया। तीनों के परिवार के लोग वकील के पास पहुंचे। यहां पर उन्होंने कोर्ट के माध्यम से आरोपियों को लेकर जानकारी मांगी।

पिस्टल और कारतूस के साथ पकड़ाए युवकों की जमानत:पुलिस ने बिश्नोई गैंग का मेंबर बताया था; इंदौर कोर्ट में वकील का पक्ष- झूठे केस में उलझाया
इंदौर की लसूड़िया पुलिस ने दिसंबर के पहले हफ्ते में राजस्थान के तीन युवकों को पकड़ा था। उन्हें बिश्नोई गैंग का मेंबर बताकर उनके पास से पिस्टल और जिंदा कारतूस बरामद किए गए थे। बाद में तीनों को जेल भेजा गया। अब मामले में जिला कोर्ट से तीनों युवकों को जमानत मिल गई है। तीनों युवकों के वकील ने कोर्ट में वह डॉक्यूमेंट रखे है जिसमें उन्हें बिना वजह पुलिस हिरासत में लेने की पहले ही अपील की गई थी। अपील में पुलिस द्वारा बेवजह तीनों को आरोपी बनाने की बात कही गई। कोर्ट इस मामले में सहमत हुई। इसके बाद तीनों को जमानत दे दी गई। जिला न्यायालय ने भूपेन्द्र सिंह निवासी सागर खरवा ब्यावर राजस्थान, आदेश चौधरी निवासी रामगंज अजमेर और दीपक सिंह निवासी अजमेर को शनिवार को जमानत दे दी है। वकील पवन राय की तरफ से तीनों की जमानत की अर्जी लगाई गई थी। लसूड़िया पुलिस ने 4 दिसंबर को तीनों आरोपियों को कोर्ट में पेश कर बिश्नोई गैंग के मेंबर बताया था। कोर्ट में यह भी कहा गया था कि, तीनों इंदौर बायपास पर किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने पहुंचे थे। इसके पहले ही पुलिस ने चेकिंग में उन्हें पकड़ लिया। वकील ने दिए यह तर्क मामले में तीनों के वकील पवन राय ने अपने तर्क में कोर्ट के सामने कुछ दस्तावेज रखे। जिसमें बताया कि गया कि उन्होंने पुलिस से न्यायालय द्वारा पत्राचार करके आरोपियों के गिरफ्तारी सबंधी कागज पुलिस अफसरों तक भेजे थे। इसमें पुलिस ने तीनों के हिरासत में नही होने की बात कही थी। वकील ने कोर्ट को बताया कि उन्होंने आरोपियों की पुलिस द्वारा बताई गिरफ्तारी के पहले कोर्ट में यह भी अपील की थी कि तीनों को पुलिस झूठे केस में फंसा सकती है। उन्होंने तीनों पर लगे प्रकरण में समय और तारीख के हिसाब से बेबुनियाद बताया। इस पर न्यायालय ने मामले को संदेह मानकर तीनों को जमानत दे दी। महाकाल दर्शन कर ओंकारेश्वर जा रहे थे वकील ने कोर्ट में यह भी बताया कि, तीनों अपनी जीप से उज्जैन से इंदौर पहुंचे थे। इंदौर बायपास से ओंकारेश्वर के लिए निकले थे। इसी दौरान मुखबिर ने पुलिसकर्मियों को जानकारी दी। भूपेंद्र पर पूर्व में छोटे प्रकरण दर्ज होने के चलते तीनों को थाने ले जाया गया। यहां पुलिसकर्मी साठगांठ की कोशिश करते रहे। उनके परिवार से संपर्क किया। तीनों के परिवार के लोग वकील के पास पहुंचे। यहां पर उन्होंने कोर्ट के माध्यम से आरोपियों को लेकर जानकारी मांगी।