नेशनल मूवमेंट फॉर ओल्ड पेंशन स्कीम मध्य प्रदेश की बैठक:प्रदेश में पेंशन बहाली के आंदोलन को विस्तार देने पर होगी चर्चा

नेशनल मूवमेंट फॉर ओल्ड पेंशन स्कीम मध्य प्रदेश की प्रांतीय बैठक 27 अक्टूबर को भोपाल में आयोजित की जा रही है। जिसमें प्रदेशभर के पदाधिकारी शामिल होंगे। बैठक में साल 2005 के बाद सरकारी सेवा में आए कर्मचारियों का बुढ़ापा सुरक्षित करने पर बात की जाएगी और मध्य प्रदेश में ओल्ड पेंशन की मांग को लेकर आंदोलन को विस्तार देने पर भी चर्चा होगी। बैठक की अध्यक्षता संगठन के राष्ट्रीय सचिव व प्रांताध्यक्ष परमानंद डेहरिया करेंगे। राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी हीरानंद नरवरिया और प्रदेश के मीडिया प्रभारी अवनीश श्रीवास्तव भी उपस्थित रहेंगे। संगठन के भोपाल जिला अध्यक्ष सुरसरि प्रसाद पटेल ने बताया कि पेंशन कर्मचारी का हक है और इसके लिए लंबी लड़ाई लड़ी जा रही है। इस बैठक का उद्देश्य उन कर्मचारियों को संगठन से जोड़ना है, जो अभी पेंशन का महत्व नहीं समझ पा रहे हैं। वे कहते हैं कि हाल ही में रिटायर हुए कर्मचारियों की स्थिति देखकर कई संभल गए हैं, पर कुछ ऐसे हैं, जो इसे अभी गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। हम ऐसे लोगों को यह बता रहे हैं कि 2-3 हजार की पेंशन में परिवार की जिम्मेदारी कैसे निभाओगे। यदि आज सब एक हो जाते हैं, तो आने वाला कल आपका अपना होगा। सरकार को मांगकर्ताओं का संख्या बल देखकर निर्णय लेना ही पड़ेगा। बैठक में 15 दिसंबर को नईदिल्ली में प्रस्तावित राष्ट्रीय अधिवेशन को लेकर भी चर्चा होगी। हमारी कोशिश है कि भोपाल और मध्य प्रदेश से अधिक से अधिक कार्यकर्ता राष्ट्रीय अधिवेशन में शामिल हों और प्रदेश को इस आंदोलन में मजबूती प्रदान करें। क्यों चाहिए पुरानी पेंशन नेशनल पेंशन स्कीम में कर्मचारियों के वेतन से 10% राशि काटी जा रही है, जिसमें 14% सरकार मिलाती है। संबंधित कंपनी इस राशि को शेयर मार्केट में लगाती है। रिटायर होने पर कर्मचारियों को कुल राशि का 50% एक मुश्त मिल जाता है और शेष राशि से मासिक पेंशन बना दी जाती है, जो 2 से 3 हजार रुपए है। जबकि पुरानी पेंशन में अंतिम आहरित वेतन की 50% राशि हर माह पेंशन के रूप में मिलती है।

नेशनल मूवमेंट फॉर ओल्ड पेंशन स्कीम मध्य प्रदेश की बैठक:प्रदेश में पेंशन बहाली के आंदोलन को विस्तार देने पर होगी चर्चा
नेशनल मूवमेंट फॉर ओल्ड पेंशन स्कीम मध्य प्रदेश की प्रांतीय बैठक 27 अक्टूबर को भोपाल में आयोजित की जा रही है। जिसमें प्रदेशभर के पदाधिकारी शामिल होंगे। बैठक में साल 2005 के बाद सरकारी सेवा में आए कर्मचारियों का बुढ़ापा सुरक्षित करने पर बात की जाएगी और मध्य प्रदेश में ओल्ड पेंशन की मांग को लेकर आंदोलन को विस्तार देने पर भी चर्चा होगी। बैठक की अध्यक्षता संगठन के राष्ट्रीय सचिव व प्रांताध्यक्ष परमानंद डेहरिया करेंगे। राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी हीरानंद नरवरिया और प्रदेश के मीडिया प्रभारी अवनीश श्रीवास्तव भी उपस्थित रहेंगे। संगठन के भोपाल जिला अध्यक्ष सुरसरि प्रसाद पटेल ने बताया कि पेंशन कर्मचारी का हक है और इसके लिए लंबी लड़ाई लड़ी जा रही है। इस बैठक का उद्देश्य उन कर्मचारियों को संगठन से जोड़ना है, जो अभी पेंशन का महत्व नहीं समझ पा रहे हैं। वे कहते हैं कि हाल ही में रिटायर हुए कर्मचारियों की स्थिति देखकर कई संभल गए हैं, पर कुछ ऐसे हैं, जो इसे अभी गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। हम ऐसे लोगों को यह बता रहे हैं कि 2-3 हजार की पेंशन में परिवार की जिम्मेदारी कैसे निभाओगे। यदि आज सब एक हो जाते हैं, तो आने वाला कल आपका अपना होगा। सरकार को मांगकर्ताओं का संख्या बल देखकर निर्णय लेना ही पड़ेगा। बैठक में 15 दिसंबर को नईदिल्ली में प्रस्तावित राष्ट्रीय अधिवेशन को लेकर भी चर्चा होगी। हमारी कोशिश है कि भोपाल और मध्य प्रदेश से अधिक से अधिक कार्यकर्ता राष्ट्रीय अधिवेशन में शामिल हों और प्रदेश को इस आंदोलन में मजबूती प्रदान करें। क्यों चाहिए पुरानी पेंशन नेशनल पेंशन स्कीम में कर्मचारियों के वेतन से 10% राशि काटी जा रही है, जिसमें 14% सरकार मिलाती है। संबंधित कंपनी इस राशि को शेयर मार्केट में लगाती है। रिटायर होने पर कर्मचारियों को कुल राशि का 50% एक मुश्त मिल जाता है और शेष राशि से मासिक पेंशन बना दी जाती है, जो 2 से 3 हजार रुपए है। जबकि पुरानी पेंशन में अंतिम आहरित वेतन की 50% राशि हर माह पेंशन के रूप में मिलती है।