सरकारों ने नही निभाया भिलाई दुर्ग को ‘एजुकेशनल हब’ बनाने का वादा
Bhilai
दुर्ग। छत्तीसगढ़ जब नया नया राज्य बना था तो भिलाई–दुर्ग को एजुकेशन हब बनाने की बात कही गई थी । कहा जा रहा था कि भिलाई को छत्तीसगढ़ का *कोटा* बनाया जायेगा। आज के समय में खुद कोटा की सांख दांव पर लगी है। कोटा में विभिन्न परीक्षाओं की तैयारी के लिए पढ़ने गए छात्र अपने कमरे में कहीं फांसी ना लगा ले इसलिए छत के सीलिंग फैन के लटकाने वाले हिस्से को स्प्रिंगदार बना दिया गया है। यदि कोई उस पर फांसी लगाता है तो पंखा नीचे लटक जाता है। ताकि हैगिंग न हो सके। ऐसे एजुकेशन हब का क्या मतलब, असफल होने पर जहां छात्र अपनी जान दे दे। छत्तीसगढ़ के पहले मुख्यमंत्री अजीत जोगी से शुरू हुई एजुकेशन हब की बात डॉ रमन सिंह, भूपेश बघेल ने भी की । पर हकीकत में दुर्ग भिलाई एजुकेशन हब के लक्ष्य से लगातार दूर होते गई है।
यहां के एजुकेशनल सेंटरो की क्वालिटी साल दर साल घटते गई है, और फीस बढ़ते गई। तकनीकी कॉलेज की सीट पूरी भर नहीं पाती। भिलाई दुर्ग के निजी इंजीनियरिंग कॉलेजों ने बीते 24 सालों में इतने लोगों ने इंजीनियरिंग की डिग्री ली, कि सबको रोजगार नहीं मिल पाया। हालांकि सैकड़ों युवक यहां से पढ़कर देश विदेश में नौकरी भी पाए, मगर अब पहले जैसा क्रेज नहीं रहा।
उच्च शिक्षा का विस्तार तो हुआ, मगर रोजगार के अवसर नहीं मिले। यहां कॉलेज बढ़ें पर गुणवत्ता और कौशल विकास फीका रहा गया। सुनियोजित योजना के अभाव ने दुर्ग भिलाई की शैक्षणिक परंपरा को लाभ कम, नुकसान ज्यादा पहुंचाया है । छत्तीसगढ़ में उच्च शिक्षा का भविष्य चुनौती पूर्ण है । उच्च शिक्षितों के आंकड़े बढ़ गए, पर ये युवा रोजगार के पर्याप्त कौशल नहीं रखते। हालांकि सरकार ने अब युवाओं को विकास के प्राथमिकता में रखा है।
विकसित भारत में छत्तीसगढ़ अहम
छत्तीसगढ़ राज्य ने विकसित भारत के संकल्प में अहम भूमिका निभाने का लिया संकल्प किया है। वर्तमान में राज्य का जीडीएसपी 5.05 लाख करोड रुपए है, जिसे अगले 5 साल में 10 लाख करोड रुपए तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।
कदम उठाने का निर्णय लिया है। छत्तीसगढ़ का जीडीएसपी दोगुना करने का लक्ष्य सामाजिक और आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान देने के साथ-साथ राज्य के लोगों को रोजगार के नए अवसर भी प्रदान करना है।