सिवनी के बरसला में दंगल का आयोजन:महाराष्ट्र के रितेश पहलवान ने जीता प्रथम पुरस्कार, 40 से अधिक लोगों ने लिया हिस्सा
सिवनी के बरसला में दंगल का आयोजन:महाराष्ट्र के रितेश पहलवान ने जीता प्रथम पुरस्कार, 40 से अधिक लोगों ने लिया हिस्सा
सिवनी के छपारा विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत रामगढ़ के बरसला गांव में इनामी दंगल का आयोजन किया गया। यह आयोजन देर रात तक चला, जिसमें विभिन्न स्थानों के पहलवानों ने अपने दांव-पेंच का प्रदर्शन किया। इस रोमांचक मुकाबले में पहला पुरस्कार महाराष्ट्र के पहलवान रितेश ने जीता। स्थानीय प्रतिभाओं को निखारने का उद्देश्य जानकारी के अनुसार, इस आयोजन का उद्देश्य स्थानीय प्रतिभाओं को एक मंच प्रदान करना था। इस दंगल में जिले और अन्य राज्यों के लगभग 40 पहलवानों ने हिस्सा लिया। दंगल का अंतिम मुकाबला महाराष्ट्र के नांदेड़ के रितेश पहलवान और बनारस के अरविंद पहलवान के बीच हुआ। इस रोमांचक कुश्ती में रितेश पहलवान ने बाजी मारी और प्रथम पुरस्कार हासिल किया। आयोजन में रहा उत्साह का माहौल दंगल में उपस्थित दंगल प्रेमियों ने इस आयोजन का भरपूर आनंद लिया और विजेताओं को पुरस्कार प्रदान किए। आयोजन समिति में अनकु गोनंगे, शंकर लाल उइके, विशकलाल उइके, नारायण कुमरे, तुलाराम बरकडे, राजकुमार आरसिया, धनपाल कुमरे, बलिराम परते, देवेंद्रचंद्र इनवाती, बृजलाल उइके, और संकट धुर्वे जैसे कई लोगों का विशेष योगदान रहा।
सिवनी के छपारा विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत रामगढ़ के बरसला गांव में इनामी दंगल का आयोजन किया गया। यह आयोजन देर रात तक चला, जिसमें विभिन्न स्थानों के पहलवानों ने अपने दांव-पेंच का प्रदर्शन किया। इस रोमांचक मुकाबले में पहला पुरस्कार महाराष्ट्र के पहलवान रितेश ने जीता। स्थानीय प्रतिभाओं को निखारने का उद्देश्य जानकारी के अनुसार, इस आयोजन का उद्देश्य स्थानीय प्रतिभाओं को एक मंच प्रदान करना था। इस दंगल में जिले और अन्य राज्यों के लगभग 40 पहलवानों ने हिस्सा लिया। दंगल का अंतिम मुकाबला महाराष्ट्र के नांदेड़ के रितेश पहलवान और बनारस के अरविंद पहलवान के बीच हुआ। इस रोमांचक कुश्ती में रितेश पहलवान ने बाजी मारी और प्रथम पुरस्कार हासिल किया। आयोजन में रहा उत्साह का माहौल दंगल में उपस्थित दंगल प्रेमियों ने इस आयोजन का भरपूर आनंद लिया और विजेताओं को पुरस्कार प्रदान किए। आयोजन समिति में अनकु गोनंगे, शंकर लाल उइके, विशकलाल उइके, नारायण कुमरे, तुलाराम बरकडे, राजकुमार आरसिया, धनपाल कुमरे, बलिराम परते, देवेंद्रचंद्र इनवाती, बृजलाल उइके, और संकट धुर्वे जैसे कई लोगों का विशेष योगदान रहा।