पोलखोल अभियान चलाएगा शासकीय शिक्षक संगठन:शिक्षा व्यवस्था को बट्‌टा लगाने वाले अधिकारियों के चेहरे से हटाएगा नकाब

शिक्षकों को उच्च पद का प्रभार देने की प्रक्रिया पिछले एक साल में पूरी नहीं हो सकी, अतिशेष शिक्षकों के समायोजन और अतिथि शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया में विसंगतियों की भरमार है। शिक्षक संगठनों के बार-बार कहने के बाद भी पढ़ाई के लिहाज से महत्वपूर्ण दिनों में शिक्षकों को एक से दूसरे स्कूलों में पदस्थ किया जा रहा है। इन स्थितियों को देखते हुए शासकीय शिक्षक संगठन ने पोलखोल अभियान चलाने का निर्णय लिया है। अभियान के दौरान संगठन स्कूल शिक्षा विभाग के हर उस अधिकारी पर नजर रखेगा, जो शिक्षा व्यवस्था को चौपट करने में भूमिका निभा रहा है। ऐसे अधिकारियों के कच्चे चिट्‌ठे बाहर आएंगे और उन्हें वरिष्ठ अधिकारियों के साथ जनता को भी जवाब देना पड़ेगा। संगठन ने विभाग के अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर प्रश्न चिन्ह लगाते हुए आरोप लगाया कि वरिष्ठ अधिकारी मनमानी पर उतर आए हैं। वे खुद जानते हैं कि सितंबर से फरवरी तक शिक्षकों के तबादले करने का सीधा असर बच्चों की पढ़ाई पर पड़ता है, फिर भी अतिशेष-अतिथि शिक्षकों की भर्ती अब तक रहे हैं। जबकि इसके लिए मुनासिब समय मार्च से जून होना चाहिए। संगठन कई मौकों पर यह बात अधिकारियों को समझा चुका है, पर वे हैं कि मानते ही नहीं हैं। विभाग ने सितंबर 2023 में उच्च पद का प्रभार देने की प्रक्रिया प्रारंभ की है और 50 प्रतिशत शिक्षकों के प्रभार के आदेश अब तक जारी नहीं हुए हैं। जिन शिक्षकों की पहुंच थी, वे स्कूलों में न जाकर दफ्तर में ही उच्च पद का प्रभार लेने में सफल हो गए, उनके आदेश ऑफलाइन जारी हो गए और जिनकी पहुंच नहीं है, उनकी दो-दो बार काउंसिलिंग कराई जा रही है और कहा जा रहा है कि ऑनलाइन आदेश जारी होंगे। संगठन कहता है कि एजुकेशन पोर्टल अपडेट किए बिना विसंगतिपूर्ण अतिशेष समायोजन प्रक्रिया लागू करने से प्रदेशभर के शिक्षकों में असमंजस की स्थिति है, जिससे शिक्षण व्यवस्था पूरी तरह से चौपट हो गई है। शिक्षण सत्र की शुरूआत के चार माह के बाद भी स्कूल में शिक्षकों की व्यवस्था नहीं है, वहीं रिक्त पदों पर अतिथि शिक्षकों की भर्ती भी नहीं हो पाई है। संगठन के कार्यकारी अध्यक्ष उपेंद्र कौशल ने मुख्यमंत्री, शिक्षामंत्री, प्रमुख सचिव स्कूल शिक्षा से विसंगतिपूर्ण नीतियां, योजना बनाने एवं दबाब देकर क्रियान्वयन कराने वाले अधिकारियों के क्रियाकलापों पर संज्ञान लेते हुए कार्यवाही कर शिक्षा विभाग को बचाने और शिक्षकों को न्याय दिलाने की मांग की है। संगठन ने चेतावनी भी दी है कि शिक्षकों को न्याय नहीं मिलता है तो अन्याय करने वाले अधिकारियों के खिलाफ न्यायालय का दरवाजा खटखटाएगा।

पोलखोल अभियान चलाएगा शासकीय शिक्षक संगठन:शिक्षा व्यवस्था को बट्‌टा लगाने वाले अधिकारियों के चेहरे से हटाएगा नकाब
शिक्षकों को उच्च पद का प्रभार देने की प्रक्रिया पिछले एक साल में पूरी नहीं हो सकी, अतिशेष शिक्षकों के समायोजन और अतिथि शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया में विसंगतियों की भरमार है। शिक्षक संगठनों के बार-बार कहने के बाद भी पढ़ाई के लिहाज से महत्वपूर्ण दिनों में शिक्षकों को एक से दूसरे स्कूलों में पदस्थ किया जा रहा है। इन स्थितियों को देखते हुए शासकीय शिक्षक संगठन ने पोलखोल अभियान चलाने का निर्णय लिया है। अभियान के दौरान संगठन स्कूल शिक्षा विभाग के हर उस अधिकारी पर नजर रखेगा, जो शिक्षा व्यवस्था को चौपट करने में भूमिका निभा रहा है। ऐसे अधिकारियों के कच्चे चिट्‌ठे बाहर आएंगे और उन्हें वरिष्ठ अधिकारियों के साथ जनता को भी जवाब देना पड़ेगा। संगठन ने विभाग के अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर प्रश्न चिन्ह लगाते हुए आरोप लगाया कि वरिष्ठ अधिकारी मनमानी पर उतर आए हैं। वे खुद जानते हैं कि सितंबर से फरवरी तक शिक्षकों के तबादले करने का सीधा असर बच्चों की पढ़ाई पर पड़ता है, फिर भी अतिशेष-अतिथि शिक्षकों की भर्ती अब तक रहे हैं। जबकि इसके लिए मुनासिब समय मार्च से जून होना चाहिए। संगठन कई मौकों पर यह बात अधिकारियों को समझा चुका है, पर वे हैं कि मानते ही नहीं हैं। विभाग ने सितंबर 2023 में उच्च पद का प्रभार देने की प्रक्रिया प्रारंभ की है और 50 प्रतिशत शिक्षकों के प्रभार के आदेश अब तक जारी नहीं हुए हैं। जिन शिक्षकों की पहुंच थी, वे स्कूलों में न जाकर दफ्तर में ही उच्च पद का प्रभार लेने में सफल हो गए, उनके आदेश ऑफलाइन जारी हो गए और जिनकी पहुंच नहीं है, उनकी दो-दो बार काउंसिलिंग कराई जा रही है और कहा जा रहा है कि ऑनलाइन आदेश जारी होंगे। संगठन कहता है कि एजुकेशन पोर्टल अपडेट किए बिना विसंगतिपूर्ण अतिशेष समायोजन प्रक्रिया लागू करने से प्रदेशभर के शिक्षकों में असमंजस की स्थिति है, जिससे शिक्षण व्यवस्था पूरी तरह से चौपट हो गई है। शिक्षण सत्र की शुरूआत के चार माह के बाद भी स्कूल में शिक्षकों की व्यवस्था नहीं है, वहीं रिक्त पदों पर अतिथि शिक्षकों की भर्ती भी नहीं हो पाई है। संगठन के कार्यकारी अध्यक्ष उपेंद्र कौशल ने मुख्यमंत्री, शिक्षामंत्री, प्रमुख सचिव स्कूल शिक्षा से विसंगतिपूर्ण नीतियां, योजना बनाने एवं दबाब देकर क्रियान्वयन कराने वाले अधिकारियों के क्रियाकलापों पर संज्ञान लेते हुए कार्यवाही कर शिक्षा विभाग को बचाने और शिक्षकों को न्याय दिलाने की मांग की है। संगठन ने चेतावनी भी दी है कि शिक्षकों को न्याय नहीं मिलता है तो अन्याय करने वाले अधिकारियों के खिलाफ न्यायालय का दरवाजा खटखटाएगा।