ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाज़ उस्मान ख़्वाजा ने संन्यास का एलान किया, 'नस्ली स्टीरियोटाइप' के लगाए आरोप
ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाज़ उस्मान ख़्वाजा ने संन्यास का एलान किया, 'नस्ली स्टीरियोटाइप' के लगाए आरोप
ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाज़ उस्मान ख़्वाजा ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास का एलान कर दिया है. वह रविवार से शुरू होने वाले एशेज़ सिरीज़ के आख़िरी टेस्ट में इंग्लैंड के ख़िलाफ़ अपना 88वां टेस्ट खेलेंगे.
यह मैच सिडनी में खेला जाएगा. यही वह मैदान है, जहां उन्होंने 2011 में इंग्लैंड के ख़िलाफ़ ही अपना डेब्यू किया था.
सिडनी क्रिकेट ग्राउंड में एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस में ख़्वाजा ने संन्यास की घोषणा की. इस दौरान उनकी पत्नी, दो बेटियां और माता-पिता भी मौजूद थे.
39 साल के ख़्वाजा ने अपने करियर में 87 टेस्ट मैच खेले हैं, जिनमें उन्होंने 43.4 की औसत से 6206 रन बनाए हैं. टेस्ट में उन्होंने 16 शतकीय पारियां खेली हैं. उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के लिए 40 वनडे और 9 टी20 मैच भी खेले हैं.
ख़्वाजा का जन्म पाकिस्तान में हुआ था और वह 15 साल पहले ऑस्ट्रेलिया के लिए खेलने वाले पहले मुस्लिम खिलाड़ी बने थे.
अपने रिटायरमेंट का एलान करते हुए उस्मान ख़्वाजा ने कहा कि वह अब भी नस्ली स्टीरियोटाइप्स से जूझ रहे हैं. उन्होंने कहा, मैं एक प्राउड मुस्लिम हूं, पाकिस्तान से आया एक लड़का, जिसको लेकर कहा गया था कि वह कभी ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट टीम के लिए नहीं खेलेगा. लेकिन, आज मुझे देखिए.
एशेज़ सिरीज़ की शुरुआत से एक दिन पहले ख़्वाजा ने गोल्फ़ खेला था और इसके बाद पर्थ में उन्हें पीठ में ऐंठन की समस्या हुई थी. इस पर ख़्वाजा ने कहा कि उनकी आलोचना इसलिए हुई क्योंकि उनके साथ अलग तरह से बर्ताव किया जाता है.
उन्होंने कहा, मीडिया और पूर्व क्रिकेटरों ने जिस तरह मुझ पर हमला किया, मैं दो दिन तक तो झेल सकता था, लेकिन यह लगातार क़रीब पांच दिनों तक चला.
उन्होंने कहा, मेरी तैयारी को लेकर जिस तरह सबने मुझ पर हमला किया, वह काफ़ी निजी था. कहा गया कि वह टीम के लिए समर्पित नहीं है, वह सिर्फ़ अपने बारे में सोचता है, उसने मैच से एक दिन पहले गोल्फ़ टूर्नामेंट खेला, वह स्वार्थी है, वह पूरी मेहनत से ट्रेनिंग नहीं करता, उसने मैच से एक दिन पहले ट्रेनिंग नहीं की, वह आलसी है.
उस्मान ख़्वाजा ने कहा, ये वही स्टीरियोटाइप्स हैं, नस्ली स्टीरियोटाइप्स, जिनके साथ मैं पूरी ज़िंदगी बड़ा हुआ हूं. मुझे लगा था कि मीडिया, पुराने खिलाड़ी और बाकी सभी लोग इन सबसे आगे बढ़ चुके हैं, लेकिन हम अब भी वहां नहीं पहुंचे हैं.(bbc.com/hindi)
ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाज़ उस्मान ख़्वाजा ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास का एलान कर दिया है. वह रविवार से शुरू होने वाले एशेज़ सिरीज़ के आख़िरी टेस्ट में इंग्लैंड के ख़िलाफ़ अपना 88वां टेस्ट खेलेंगे.
यह मैच सिडनी में खेला जाएगा. यही वह मैदान है, जहां उन्होंने 2011 में इंग्लैंड के ख़िलाफ़ ही अपना डेब्यू किया था.
सिडनी क्रिकेट ग्राउंड में एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस में ख़्वाजा ने संन्यास की घोषणा की. इस दौरान उनकी पत्नी, दो बेटियां और माता-पिता भी मौजूद थे.
39 साल के ख़्वाजा ने अपने करियर में 87 टेस्ट मैच खेले हैं, जिनमें उन्होंने 43.4 की औसत से 6206 रन बनाए हैं. टेस्ट में उन्होंने 16 शतकीय पारियां खेली हैं. उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के लिए 40 वनडे और 9 टी20 मैच भी खेले हैं.
ख़्वाजा का जन्म पाकिस्तान में हुआ था और वह 15 साल पहले ऑस्ट्रेलिया के लिए खेलने वाले पहले मुस्लिम खिलाड़ी बने थे.
अपने रिटायरमेंट का एलान करते हुए उस्मान ख़्वाजा ने कहा कि वह अब भी नस्ली स्टीरियोटाइप्स से जूझ रहे हैं. उन्होंने कहा, मैं एक प्राउड मुस्लिम हूं, पाकिस्तान से आया एक लड़का, जिसको लेकर कहा गया था कि वह कभी ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट टीम के लिए नहीं खेलेगा. लेकिन, आज मुझे देखिए.
एशेज़ सिरीज़ की शुरुआत से एक दिन पहले ख़्वाजा ने गोल्फ़ खेला था और इसके बाद पर्थ में उन्हें पीठ में ऐंठन की समस्या हुई थी. इस पर ख़्वाजा ने कहा कि उनकी आलोचना इसलिए हुई क्योंकि उनके साथ अलग तरह से बर्ताव किया जाता है.
उन्होंने कहा, मीडिया और पूर्व क्रिकेटरों ने जिस तरह मुझ पर हमला किया, मैं दो दिन तक तो झेल सकता था, लेकिन यह लगातार क़रीब पांच दिनों तक चला.
उन्होंने कहा, मेरी तैयारी को लेकर जिस तरह सबने मुझ पर हमला किया, वह काफ़ी निजी था. कहा गया कि वह टीम के लिए समर्पित नहीं है, वह सिर्फ़ अपने बारे में सोचता है, उसने मैच से एक दिन पहले गोल्फ़ टूर्नामेंट खेला, वह स्वार्थी है, वह पूरी मेहनत से ट्रेनिंग नहीं करता, उसने मैच से एक दिन पहले ट्रेनिंग नहीं की, वह आलसी है.
उस्मान ख़्वाजा ने कहा, ये वही स्टीरियोटाइप्स हैं, नस्ली स्टीरियोटाइप्स, जिनके साथ मैं पूरी ज़िंदगी बड़ा हुआ हूं. मुझे लगा था कि मीडिया, पुराने खिलाड़ी और बाकी सभी लोग इन सबसे आगे बढ़ चुके हैं, लेकिन हम अब भी वहां नहीं पहुंचे हैं.(bbc.com/hindi)